बांग्लादेश में जारी राजनीतिक हिंसा और अस्थिर माहौल के बीच पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा ज़िया के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष खालिदा ज़िया का 80 वर्ष की उम्र में अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में करीब तीन दशकों तक चली चर्चित प्रतिद्वंद्विता, जिसे ‘बैटल ऑफ द बेगम्स’ कहा जाता था, का भी अंत हो गया।
बांग्लादेश की राजनीति पिछले लगभग 30 वर्षों से दो मजबूत महिला नेताओं—खालिदा ज़िया और शेख हसीना—के इर्द-गिर्द घूमती रही है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही ऐसे परिवारों से आती थीं, जिनका बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम से गहरा नाता रहा है। दोनों के जीवन में पति, पिता और करीबी परिवारजनों की हत्या जैसी दर्दनाक घटनाएं हुईं और राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर आई। यही समानताएं समय के साथ कट्टर राजनीतिक दुश्मनी में बदल गईं।
दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर
खालिदा ज़िया ने मार्च 1991 से मार्च 1996 तक और फिर जून 2001 से अक्टूबर 2001 तक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। जब वे पहली बार सत्ता में आईं, तब उन पर शेख हसीना की अवामी लीग के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने के आरोप लगे।
बाद में जब शेख हसीना सत्ता में आईं, तो उनकी सरकार पर भी BNP के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई करने के आरोप लगे। सत्ता और प्रतिशोध की इस लड़ाई में अंततः खालिदा ज़िया को जेल भी जाना पड़ा। हालांकि यह टकराव हमेशा ऐसा नहीं रहा। एक समय ऐसा भी था जब दोनों ‘बेगमों’ ने मिलकर बांग्लादेश के दूसरे सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद के खिलाफ लोकतंत्र बहाली की लड़ाई लड़ी थी।
अंतिम वर्षों में मिली राहत, लेकिन सेहत ने नहीं दिया साथ
साल 2024 में छात्र आंदोलन के जरिए शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद खालिदा ज़िया को पूरी तरह से रिहाई मिली और उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों को समाप्त कर दिया गया। अंतरिम सरकार ने उन्हें VVIP सुरक्षा भी प्रदान की, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वे सक्रिय राजनीति में लौट नहीं सकीं।
नवंबर 2025 से खालिदा ज़िया कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें लिवर की समस्या, डायबिटीज, छाती और हृदय संबंधी परेशानियां थीं। 23 नवंबर से वे ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती थीं और 11 दिसंबर को उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। आखिरकार आज सुबह उनका निधन हो गया।
खालिदा ज़िया के निधन के साथ न केवल एक युग का अंत हुआ, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में दशकों से चली आ रही ‘बैटल ऑफ द बेगम्स’ भी इतिहास बन गई।
