रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज़ हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हालिया घटनाक्रम ने हालात को फिर से गंभीर बना दिया है। रूस द्वारा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निजी आवास पर ड्रोन हमले के दावे के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई है और दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
रूस ने सोमवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन ने उत्तरी रूस में स्थित राष्ट्रपति पुतिन के निजी आवास को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कथित हमले में कुल 91 ड्रोन इस्तेमाल किए गए थे, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते मार गिराया। रूस के इन आरोपों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता का माहौल बन गया है और युद्धविराम की संभावनाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने रूस के दावों को “बेहद झूठा और निराधार” बताते हुए कहा कि मॉस्को शांति वार्ताओं को कमजोर करने और अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति बटोरने के लिए इस तरह के बयान दे रहा है।
इस पूरे मामले पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप ने बताया कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर इस कथित ड्रोन हमले की जानकारी दी थी। फ्लोरिडा में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से पहले ट्रंप ने कहा कि वह इस तरह की घटनाओं से नाराज़ हैं, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह दावा पूरी तरह गलत भी हो सकता है।
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि युद्ध के दौरान सैन्य ठिकानों पर हमले एक अलग बात है, लेकिन किसी देश के नेता के निजी आवास को निशाना बनाना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते 24 घंटों में उनकी पुतिन से दो बार बातचीत हुई है, जिसे उन्होंने “काफी सकारात्मक” करार दिया।
इधर, ज़मीनी हकीकत शांति प्रयासों से उलट नजर आ रही है। राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैन्य बलों को यूक्रेन के ज़ापोरिज़िया क्षेत्र पर पूरी तरह कब्ज़ा करने के लिए अभियान तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही क्रेमलिन ने एक बार फिर मांग दोहराई है कि यूक्रेन डोनबास क्षेत्र से अपने सैनिकों को वापस बुलाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुतिन के आवास पर ड्रोन हमले का दावा सही साबित होता है, तो इससे न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध और भड़क सकता है, बल्कि अब तक चल रहे शांति प्रयासों को भी गंभीर झटका लग सकता है।
