ट्रंप की तारीफ करने वाला पाकिस्तान पलटा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए सीज़फायर का श्रेय चीन को दिया

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मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव और भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद लागू हुए सीज़फायर को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेय लेने की होड़ मच गई है। पहले अमेरिका ने इस सीज़फायर का श्रेय अपने हस्तक्षेप को दिया था, वहीं अब चीन ने भी दावा किया है कि उसकी मध्यस्थता के चलते दोनों देशों के बीच युद्ध टल गया। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ पाकिस्तान के बदले हुए रुख के रूप में सामने आया है, जिसने अब अमेरिका को छोड़कर चीन के दावे का समर्थन किया है।

पाकिस्तान ने बदला सुर, चीन को बताया ‘शांति दूत’

अब तक पाकिस्तान इस सीज़फायर के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की खुलकर प्रशंसा करता रहा था, लेकिन हालिया बयान में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपना रुख बदल दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में चीन की भूमिका निर्णायक रही है।

उनके मुताबिक, 6 से 10 मई के बीच जब हालात बेहद तनावपूर्ण थे, उस दौरान चीनी नेतृत्व लगातार पाकिस्तान के संपर्क में था। इतना ही नहीं, चीन ने भारतीय नेतृत्व के साथ भी कूटनीतिक संवाद बनाए रखा था। पाकिस्तान का अब दावा है कि बीजिंग की सक्रिय और सकारात्मक कूटनीति के कारण ही सीमा पर बढ़ा तनाव कम हुआ और युद्ध जैसी स्थिति टल सकी।

भारत का सख्त रुख: तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार

चीन और पाकिस्तान के इन दावों को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारत सरकार का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है कि कश्मीर या सीमा विवाद जैसे मामलों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।

भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद हुआ सीज़फायर किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव का नतीजा नहीं था, बल्कि पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) द्वारा की गई अपील और दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर हुई बातचीत के चलते संभव हुआ। भारत इससे पहले भी चीनी विदेश मंत्री वांग यी के इस तरह के दावों को नकार चुका है।

पाकिस्तान ने क्यों बदला रुख?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा चीन को श्रेय देना एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, पाकिस्तान दक्षिण एशिया में चीन को एक प्रभावशाली ‘शांति रक्षक’ के रूप में पेश करना चाहता है, जिससे वैश्विक स्तर पर चीन की भूमिका मजबूत हो। दूसरा, पाकिस्तान अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर चीन के साथ रिश्तों को और गहरा करने का संकेत दे रहा है।

अमेरिका और चीन के बीच ‘क्रेडिट वॉर’

मई 2025 के इस संकट को लेकर अब अमेरिका और चीन आमने-सामने हैं। एक ओर डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी हस्तक्षेप के बिना युद्ध रुकना संभव नहीं था, तो दूसरी ओर चीन पाकिस्तान के समर्थन के साथ खुद को शांति का सूत्रधार बता रहा है।

भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि दोनों महाशक्तियां इस घटनाक्रम को अपने वैश्विक प्रभाव को दिखाने के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं, जबकि भारत इसे पूरी तरह द्विपक्षीय सैन्य समझ का परिणाम मानता है।

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Author: sajagkutch

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