करीब ₹1500 करोड़ के भूमि घोटाले में सुरेंद्रनगर जिले के कलेक्टर डॉ. राजेंद्र पटेल की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच और तेज हो गई है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते अब उनके निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू होने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के निर्देश मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग किसी भी समय कलेक्टर डॉ. राजेंद्र पटेल को निलंबित कर सकता है।
जांच जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में कई अन्य भ्रष्ट अधिकारियों पर भी कानूनी शिकंजा कसने की संभावना जताई जा रही है।
ED ने 2 जनवरी को सुरेंद्रनगर जिले में NA (नॉन-एग्रीकल्चर) भूमि घोटाले के मामले में कलेक्टर डॉ. राजेंद्र पटेल को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उनके कार्यालय और निवास स्थान से हिसाब-किताब की डायरी, मोबाइल फोन, पीडीएफ फाइलें और अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं। इन सभी दस्तावेजों को अब FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) भेजा गया है, जहां उनकी विस्तृत जांच की जाएगी।
इसके अलावा, कलेक्टर के निजी सहायक जयराजसिंह झाला के पास से भी व्हाट्सएप चैट और लेन-देन से जुड़ी सूचियां मिली हैं, जिनकी जांच जारी है। इन दस्तावेजों से आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, डॉ. राजेंद्र पटेल का अहमदाबाद के गोता इलाके में शुकुल प्लैटिनम सोसायटी में एक फ्लैट है, जिसका किराया सीधे उनकी मां के बैंक खाते में जमा होता है। हालांकि, सरकारी पोर्टल पर उन्होंने केवल स्थावर संपत्ति और कृषि भूमि का ही उल्लेख किया था।
ED का आरोप है कि कृषि आय और अन्य आय के स्रोतों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई गई, जिसके बाद अब पूर्व कलेक्टर की सभी संपत्तियों और कृषि भूमि की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
अब तक की जांच में सामने आया है कि NA फाइलों में मिलने वाले कमीशन का 50 प्रतिशत हिस्सा स्वयं कलेक्टर लेते थे, जबकि शेष राशि अन्य अधिकारियों में बांटी जाती थी। जब्त की गई डायरी में अब तक ₹10 करोड़ की रिश्वत लेने का उल्लेख मिला है। FSL जांच पूरी होने के बाद इस राशि में और बढ़ोतरी होने की आशंका है।
ED की रिपोर्ट और पुख्ता सबूतों के आधार पर गांधीनगर में डॉ. राजेंद्र पटेल के निलंबन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
