सुरेंद्रनगर जिले की मुख्य सब-जेल इस समय अपने 120 वर्षों के इतिहास के सबसे खराब दौर से गुजर रही है। वर्ष 1905 में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित यह जेल आज बढ़ते अपराध और कैदियों की संख्या के सामने पूरी तरह असहाय नजर आ रही है। पहली बार जेल में कैदियों की संख्या 300 तक पहुंच गई है, जो जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
सुरेंद्रनगर सब-जेल की आधिकारिक क्षमता मात्र 125 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में यहां 13 महिला और 287 पुरुष कैदी सहित कुल 300 कैदी बंद हैं। कैदियों की संख्या में अचानक हुई इस भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण ध्रांगध्रा सब-जेल में चल रहा नवीनीकरण कार्य है। ध्रांगध्रा जेल बंद होने के कारण वहां के 30 से अधिक कैदियों को सुरेंद्रनगर स्थानांतरित किया गया है।
कैदियों की संख्या तीन गुना बढ़ जाने के बावजूद जेल में सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्टाफ बेहद सीमित है। फिलहाल केवल 21 कर्मचारी ही 300 कैदियों की निगरानी कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि जेल अधीक्षक, सूबेदार और हवलदार जैसे प्रमुख प्रशासनिक पद कई वर्षों से खाली पड़े हैं, जिससे जेल का संचालन और भी कठिन हो गया है।
जेल में जगह और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी के कारण कैदियों और जेल स्टाफ के बीच अक्सर टकराव की स्थिति बन रही है। बीते तीन दिनों में दो कैदियों द्वारा शैंपू पीकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटनाओं ने प्रशासन को हिला कर रख दिया है। जगह की कमी के कारण जेल में कैंटीन या किसी भी तरह की रचनात्मक गतिविधियां भी संभव नहीं हो पा रही हैं।
जेल की बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्थापना के 120 वर्षों में यहां कभी भी स्थायी मेडिकल ऑफिसर या महिला नर्स की नियुक्ति नहीं की गई। मामूली बीमारी की स्थिति में भी कैदियों को सिविल अस्पताल ले जाना पड़ता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम भरा साबित होता है।
जेल प्रशासन की एक और गंभीर समस्या स्टाफ का लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहना है। जेल सिपाही सहित 15 से अधिक कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से इसी जेल में कार्यरत हैं। लंबे समय तक एक ही जगह रहने से कैदियों और स्टाफ के बीच नजदीकी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे जेल में प्रतिबंधित या अवैध वस्तुओं की एंट्री आसान हो जाती है और अनुशासन प्रभावित होता है। ऐसे में स्टाफ के तत्काल तबादले की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जेल की बिगड़ती स्थिति का जायजा लेने के लिए एएसपी वेदिका बिहानी, एलसीबी और एसओजी की टीम ने जेल का निरीक्षण किया। 125 की क्षमता के मुकाबले 300 कैदियों की स्थिति देखकर वरिष्ठ अधिकारी भी हैरान रह गए। इस समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर बाकरथली रोड पर नई आधुनिक जेल के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। साथ ही, जेल में अनुशासन भंग करने वाले कैदियों को अन्य जिलों की जेलों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित किया जा सके।
