गुजरात हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: बेटी को सहारा न देने वाले माता-पिता भी आत्महत्या के लिए जिम्मेदार, पति को सजा से राहत

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विवाहित महिलाओं द्वारा ससुराल में प्रताड़ना से तंग आकर बच्चों सहित आत्महत्या करने के बढ़ते मामलों पर गुजरात हाईकोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति गीता गोपी ने एक अहम फैसले में कहा कि जो माता-पिता अपनी बेटी को ससुराल में हो रही क्रूरता सहने के लिए मजबूर करते हैं या उसे मायके में शरण देने से इनकार करते हैं, उन्हें भी बेटी की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है।

मामले के अनुसार, एक विवाहिता महिला ने अपने शराबी पति की लगातार मारपीट और उत्पीड़न से परेशान होकर अपने एक साल के मासूम बच्चे के साथ ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस प्रकरण में निचली अदालत ने पति को सात साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में पति को दोषमुक्त कर दिया, लेकिन साथ ही मायके पक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कई बार बेटी जब ससुराल में अत्याचार सहन नहीं कर पाती, तो वह मायके में मदद के लिए आती है। ऐसे में कई माता-पिता या समाज के बुजुर्ग उसे समझाकर या दबाव डालकर वापस ससुराल भेज देते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो माता-पिता बेटी को शरण देने से इनकार कर उसे जानलेवा हालात में वापस भेजते हैं, उनके खिलाफ ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ के तहत कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि माता-पिता चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति में हों, उन्हें अपने बच्चों का जीवन खतरे में डालने का कोई अधिकार नहीं है। बेटी के लिए मायके के दरवाजे हर हाल में खुले रहने चाहिए।

न्यायमूर्ति गीता गोपी ने समाज में प्रगतिशील सोच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि माता-पिता को इस विषय में जागरूक करना बेहद जरूरी है। साथ ही, पुलिस और प्रशासन को भी संवेदनशील और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। यदि बेटी को सहारा न देने वाले माता-पिता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, तो विवाहित महिलाओं की आत्महत्या के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

अंत में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जिस तरह ससुराल पक्ष बेटी को मौत के लिए मजबूर करता है, उसी तरह संकट के समय उसका साथ छोड़ने वाले माता-पिता भी उतने ही जिम्मेदार हैं। यह टिप्पणी समाज में बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित हो सकती है।

 

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Author: sajagkutch

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