गुजरात में इस वर्ष बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। भारी नुकसान के बाद राज्य सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये के कृषि सहायता पैकेज की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फसल नुकसान की भरपाई अब तक पूरी तरह नहीं हो पाई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि एक लाख से अधिक किसान अभी तक कृषि सहायता की दूसरी किस्त से वंचित हैं, जबकि कई किसानों को पहली किस्त भी नहीं मिली।
बेमौसम बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलें पानी में बह गईं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। खेती की लागत पहले ही लगातार बढ़ रही है—खाद, बीज, कीटनाशक और खेत मजदूरी सब कुछ महंगा हो चुका है। इसके बावजूद किसानों को अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल पाता। ऐसे में प्राकृतिक आपदा ने किसानों की थाली से निवाला छीन लिया और उन्हें भारी आर्थिक संकट में डाल दिया।
किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार ने सहायता पैकेज की घोषणा तो की, लेकिन उसका लाभ समय पर किसानों तक नहीं पहुंचा। सरकार ने दो हेक्टेयर की सीमा तक 44 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया था, मगर दो से ढाई महीने बीत जाने के बाद भी हजारों किसान इंतजार कर रहे हैं। अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 10 हजार करोड़ रुपये के पैकेज में से कितनी राशि वितरित की गई, कितने किसान वंचित रहे और कितने आवेदनों को खारिज किया गया।
वहीं दूसरी ओर, सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से मूंगफली की खरीद तो कर ली, लेकिन भुगतान के मामले में भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। हजारों क्विंटल मूंगफली खरीदे जाने के बावजूद 50 दिनों से अधिक समय बीत चुका है और अब तक किसानों को उनके पैसे नहीं मिले हैं। राज्यभर में करीब 35 हजार किसान ऐसे हैं जिन्हें मूंगफली की बिक्री का भुगतान लंबित है।
शादी-ब्याह का मौसम होने के बावजूद अपनी उपज का पैसा न मिलने से कई किसान मजबूरी में ब्याज पर कर्ज लेने को विवश हो गए हैं। इसी नाराजगी के चलते 21 जनवरी को देवभूमि द्वारका कलेक्टर कार्यालय में किसानों द्वारा प्रदर्शन का निर्णय लिया गया है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही भुगतान और कृषि सहायता नहीं मिली, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
