प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल के दो दिवसीय दौरे के बीच राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस यात्रा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि यह भारत की स्थायी विदेश नीति और पारंपरिक फिलिस्तीन-समर्थन के खिलाफ है।
ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा कि गाजा में जो स्थिति है उसे “नरसंहार” कहा जाना चाहिए और ऐसे समय में इज़राइल जाना गलत है। उन्होंने इज़राइल के प्रधानमंत्री को ‘युद्ध अपराधी’ करार देते हुए अपनी नाराजगी जताई।
सबसे विवादास्पद बात ओवैसी ने यह कही कि पीएम मोदी का इज़राइल दौरा खत्म होते ही अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है — यह एक “संभावना” के रूप में उन्होंने ज़िक्र किया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
ओवैसी ने यह भी कहा कि भारत ने वर्षों तक पेलिस्तीनियों के अधिकारों का समर्थन किया है, और इस दौरे को उस ऐतिहासिक समर्थन के विरुद्ध करार दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट का अंत “ज़ायोनिज़्म मुर्दाबाद” के नारे के साथ किया, जो इज़राइल की राजनीतिक विचारधारा के प्रति उनके कड़े विरोध को दर्शाता है।
इस दौरे को लेकर प्रतिरोध का स्वर केवल ओवैसी तक सीमित नहीं है — कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कहा है कि भारत को गाज़ा में हुए मानवाधिकार हनन का जिक्र करना चाहिए और न्याय की बात उठानी चाहिए, न कि केवल इज़राइल के साथ अपने संबंधों को “रणनीतिक” रूप में पेश करना।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव पहले से ही बढ़ रहा है, और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को अपने विदेश नीति के संतुलन को बनाए रखने में चुनौतियाँ मिल रही हैं।
