संसद प्रश्न: भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पांच मॉड्यूलों की समग्र संरचना तैयार कर ली है। राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा समिति ने इस संरचना की समीक्षा की है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में गगनयान कार्यक्रम में संशोधन कर वर्ष 2028 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल के विकास और शुभारंभ को मंजूरी दी। इसरो के केंद्रों/इकाइयों में इस मॉड्यूल की समग्र प्रणाली अभियांत्रिकी और विभिन्न उप-प्रणालियों के प्रौद्योगिकी विकास कार्य प्रगति पर हैं।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) के पहले मॉड्यूल के ढांचे के निर्माण के लिए भारतीय उद्योगों से रुचि की अभिव्यक्ति (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) जारी की है।

वर्तमान में दी गई मंजूरी भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल तक ही सीमित है और इसके विकास तथा शुभारंभ की लागत चार साल (2025 से 2028) की अवधि के लिए 1763 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

इसका लक्ष्य वर्ष 2028 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल और वर्ष 2035 तक सभी पांच मॉड्यूल को परिचालन योग्‍य बनाना है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए लक्षित प्रमुख तकनीकी लक्ष्यों में डॉकिंग, रोबोटिक्स, कक्षा में ईंधन भरना, चालक दल के रहने की व्यवस्था, वाहन के भीतर पहनने योग्य सूट और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोगों के लिए रैक शामिल हैं। प्रमुख लक्षित सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान क्षेत्रों में जीवन विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स, पदार्थ विज्ञान और विनिर्माण प्रौद्योगिकियां शामिल है।

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

Sajag Kutch
Author: Sajag Kutch

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