गुजरात के भરૂच में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। जैन संगठनों और विभिन्न हिंदू धार्मिक समूहों ने दावा किया है कि यह स्थल मूल रूप से एक प्राचीन जैन धार्मिक परिसर था, जिसे “समरी विहार” के नाम से जाना जाता था। इसी मांग को लेकर 15 जून को भરૂच में एक विशाल रैली आयोजित करने की घोषणा की गई है, जिसमें गुजरात और महाराष्ट्र से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब पुरातत्व विभाग ने सफाई कार्य के दौरान वर्षों से बंद एक भूमिगत हिस्से का दरवाजा खोला। इसके बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और तस्वीरों को आधार बनाकर कुछ संगठनों ने दावा किया कि वहां जैन धर्म से जुड़े प्राचीन अवशेष और प्रतिमाओं के संकेत मिले हैं।
जैन और हिंदू संगठनों का कहना है कि स्थल की स्थापत्य शैली, स्तंभों की नक्काशी तथा अन्य संरचनात्मक विशेषताएं जैन मंदिरों से मिलती-जुलती हैं। कुछ संतों और धार्मिक नेताओं ने भी दावा किया है कि निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराई जाए तो इस स्थान के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने इन दावों का विरोध करते हुए कहा है कि यह एक मान्यता प्राप्त ऐतिहासिक मस्जिद है, जिसका उल्लेख सरकारी अभिलेखों और वक्फ रिकॉर्ड में मौजूद है। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त प्रमाणों के धार्मिक विवाद खड़ा किया जा रहा है। मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और संबंधित पक्ष न्यायालय का रुख कर चुके हैं।
आयोजकों के अनुसार 15 जून को निकाली जाने वाली रैली में 5,000 से 7,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है। रैली शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी, जहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर स्थल की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान की जांच कराने तथा इसे उसके कथित मूल स्वरूप में स्थापित करने की मांग की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने भરૂच सहित पूरे गुजरात में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को तेज कर दिया है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और शांति तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की प्रमुख चर्चाओं में शामिल रहने की संभावना है।
