तीन महीनों में भारतीयों ने घरों में रखा 50,000 किलो से अधिक सोना बेचा, आखिर किस बात का है डर?

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देश में सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बीच एक चौंकाने वाला रुझान सामने आया है। पिछले तीन महीनों में भारतीय परिवारों ने अपने घरों में वर्षों से सुरक्षित रखा लगभग 50,000 किलोग्राम (50 टन) सोना बेच दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मुनाफावसूली का मामला नहीं है, बल्कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की सोच में आए बदलाव का भी संकेत है।

जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सोने की कीमतों में लगातार आई तेजी के कारण लोगों ने अपने पुराने आभूषण और सोना बेचकर ऊंचे दामों का लाभ उठाना शुरू कर दिया। जिन परिवारों ने वर्षों पहले कम कीमत पर सोना खरीदा था, उन्हें मौजूदा कीमतों पर अच्छा लाभ मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग सोना बेचकर रियल एस्टेट, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य वित्तीय साधनों में निवेश कर रहे हैं, जबकि कुछ परिवार बढ़ती महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य घरेलू आवश्यकताओं के लिए नकदी जुटाने के उद्देश्य से भी सोना बेच रहे हैं।

सर्राफा कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंची कीमतों के कारण पुराने आभूषणों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे बाजार में रिसाइकिल किए गए सोने (Recycled Gold) की आपूर्ति बढ़ी है, जिससे नए सोने के आयात पर भी कुछ हद तक दबाव कम हुआ है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारतीय परिवार अब भी सोने को सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक मानते हैं। मौजूदा बिक्री को सोने से दूरी बनाने के बजाय रिकॉर्ड कीमतों का लाभ उठाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यदि भविष्य में कीमतों में गिरावट आती है, तो कई निवेशक दोबारा सोने की खरीदारी भी कर सकते हैं।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यह रुझान दर्शाता है कि भारतीय निवेशक अब पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और अवसरवादी दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे केवल सोना जमा करने के बजाय बाजार की स्थिति के अनुसार अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं।

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Author: sajagkutch

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