गुजरात के सूरत शहर में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के मोटा वराछा क्षेत्र में करीब 400 मीटर लंबी सड़क अचानक धंस गई, जिससे सड़क पर एक-दो नहीं बल्कि 4 से 5 विशाल गड्ढे बन गए। इनमें से कुछ गड्ढे इतने बड़े हैं कि उनमें पूरी कार समा सकती है। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि जिस सड़क पर यह हादसा हुआ, वहां कुछ समय पहले ड्रेनेज लाइन बिछाने का काम किया गया था। ड्रेनेज का कार्य पूरा होने के बाद सड़क का दोबारा निर्माण किया गया, लेकिन पहली ही बारिश में पूरी सड़क बैठ जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही सूरत महानगरपालिका (एसएमसी) के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित सड़क को तत्काल यातायात के लिए बंद कर दिया गया और जेसीबी सहित भारी मशीनों की मदद से मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।
स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़कें यदि पहली ही बारिश में धंस जाएं, तो यह विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। नागरिकों ने दोषी ठेकेदारों और निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान यदि ड्रेनेज व्यवस्था और सड़क निर्माण की गुणवत्ता मजबूत न हो, तो इस तरह की घटनाएं भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं। ऐसे में समय रहते तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।
