शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता और युवा आंदोलनकारी अभिजीत दीपके ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की, उन्हें जबरन हिरासत में लिया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने का प्रयास किया। इन आरोपों के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है।
अभिजीत दीपके का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और वे केवल छात्रों तथा युवाओं की समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना चाहते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया और प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं, आंदोलन से जुड़े समर्थकों ने भी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
दूसरी ओर, आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अभिजीत दीपके ने कहा कि दबाव या कार्रवाई के बावजूद वे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध, पुलिस कार्रवाई और नागरिक अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज कर दी है।
