सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के लिए आंदोलन चला रहे सोनम वांगचुक को 20 दिन की लगातार भूख हड़ताल के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस का कहना है कि उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह को देखते हुए यह कदम उठाया गया, ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और जवाबदेही तय करने जैसी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। उनकी तबीयत लगातार कमजोर होने के बाद डॉक्टरों ने स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी।
पुलिस कार्रवाई के दौरान जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और प्रदर्शन स्थल को खाली कराया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अदालत के निर्देशों और मेडिकल सलाह के अनुरूप की गई, जबकि वांगचुक के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध प्रदर्शन स्थल से हटाया गया।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जोड़ते हुए आलोचना की। वहीं, वांगचुक के समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया और उनकी मांगों पर सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
