केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने ऑल-वुमन कोचेस कोर्स में भारतीय खेलों में महिलाओं के लिए और बेहतर रास्ते बनाने का आह्वान किया

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नई दिल्ली में एआईटीए एसीई 2032 पहल के तहत, उन्होंने जमीनी स्तर पर भागीदारी, महिला कोचिंग, प्रतिभा विकास और खेलों में पेशेवर अवसरों पर जोर दिया

युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने शनिवार को नई दिल्ली के दिल्ली लॉन टेनिस एसोसिएशन (डीएलटीए) टेनिस स्टेडियम में, ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (एआईटीए) की एसीई 2032 पहल के अंतर्गत आयोजित ऑल-वुमन कोचेस कोर्स को संबोधित किया। उन्होंने खेलों में महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें जमीनी स्तर पर भागीदारी और कोचिंग से लेकर उच्च-स्तरीय प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व तक के क्षेत्र शामिल हैं।

इस कार्यक्रम में डीएलटीए के अध्यक्ष श्री रोहित राजपाल, एआईटीए के कोचिंग निदेशक श्री कंवलजीत सिंह, डेविस कप कोच श्री आशुतोष सिंह, एआईटीए के मानद सचिव श्री सुंदर अय्यर, एआईटीए के कोषाध्यक्ष श्री दिनेश अरोड़ा और बीकेजेसी कप से जुड़ीं कोच राधिका कानितकर शामिल हुईं। इसके अलावा, कोचों और खेल पेशेवरों ने कोच शिक्षा, जमीनी स्तर पर टेनिस और एथलीट विकास को मजबूत करने के बारे में अपने विचार साझा किए।युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) और भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य कोच शिक्षा, प्रतिभा की पहचान और उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण के बीच संबंधों को मजबूत करना है।

 

जमीनी स्तर से लेकर उच्च-स्तरीय प्रदर्शन तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना

 

केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने इस बात पर जोर दिया कि एक प्रमुख खेल राष्ट्र बनने का भारत का लक्ष्य, प्रतिभाओं की जल्द पहचान करने और यह सुनिश्चित करने पर निर्भर करता है कि महिलाओं और लड़कियों को योग्य कोच, उपयुक्त बुनियादी ढांचा, नियमित प्रतियोगिताएं और निरंतर सहयोग मिल सके।

उन्होंने बताया कि खेलों से जुड़ी प्रतिभाएं ग्रामीण, आदिवासी, अर्ध-शहरी और शहरी—सभी तरह के समुदायों में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भागीदारी का विस्तार करना, भारत के प्रतिभा पूल को व्यापक बनाने और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं के लिए अवसर केवल खेल के मैदान तक ही सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें कोचिंग, खेल विज्ञान, प्रशासन, कार्यक्रम प्रबंधन और अन्य पेशेवर भूमिकाओं में भी आगे बढ़ने के मौके मिलने चाहिए।

चर्चाओं में खेलो इंडिया ढांचे के तहत अस्मिता महिला लीग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जो व्यवस्थित खेलों तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर रही हैं। 2021 में शुरू की गई ये लीग तीन लाख से अधिक महिलाओं तक पहुंची हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की महिलाओं को खेलों में भाग लेने और प्रतिस्पर्धा करने के अवसर मिले हैं।

 

इसके अलावा, जमीनी स्तर की पहलों को खेलो इंडिया केंद्रों, मान्यता प्राप्त अकादमियों और सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस से जोड़ने की ज़रुरत पर भी जोर दिया गया, ताकि होनहार खिलाड़ियों को उच्च स्तर के प्रदर्शन की ओर बढ़ने में मदद मिल सके।

महिला कोचिंग कार्यबल को और मजबूत बनाना

इस पाठ्यक्रम का एक मुख्य उद्देश्य योग्य महिला कोचों की संख्या बढ़ाना और विभिन्न राज्यों में कोचिंग शिक्षा तथा प्रमाणन तक पहुंच का विस्तार करना था। कोचिंग के क्षेत्र में महिलाओं की अधिक भागीदारी लड़कियों को खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है, साथ ही इससे खिलाड़ियों के विकास की गुणवत्ता और पहुंच भी मजबूत होगी।

एआईटीए एसीई 2032 पहल का उद्देश्य कोच शिक्षा को प्रतिभा की पहचान और बेहतरीन खिलाड़ियों के विकास से जोड़ना है। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिस्पर्धी खेलों की जरूरतों के हिसाब से कोचों को तैयार करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निरंतर पेशेवर विकास बहुत महत्वपूर्ण हैं।

चर्चाओं में उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण और विशेष कोचिंग क्षमताओं पर भी बात हुई। उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण से जुड़ी शीरिका बर्मन ने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में 10 दिसंबर से बेंगलुरु में एक कोर्स शुरू करने की संभावना पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत सीएचपी कोर्स के लिए 16 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा।

कोचिंग और खिलाड़ियों के विकास पर क्षेत्रीय दृष्टिकोण

 

प्रतिभागियों ने ज़मीनी स्तर पर टेनिस को मजबूत करने और कोचिंग के तरीकों को बेहतर बनाने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव और विचार साझा किए।

 

तमिलनाडु की प्रीति श्रीनिवासन ने कोचिंग पर विशेष ध्यान देने और ज़मीनी स्तर पर टेनिस के विकास के महत्व पर जोर दिया। अरुणाचल प्रदेश के मारनु रिबा ने खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया और कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि खिलाड़ी अपनी क्षमताएं बढ़ाते समय खेल का आनंद भी लें। जम्मू-कश्मीर की हरजोत कौर ने खासकर शुरुआती खिलाड़ियों के लिए, लेवल वन फिटनेस कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एआईटीए एसीई 2032 के तहत केवल महिलाओं के लिए कोच प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, भारतीय खेलों में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को मजबूत करने की एक व्यापक पहल है। कोचिंग के अवसरों का विस्तार करके, जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को समर्थन देकर और उच्च-स्तरीय खेलों तक पहुँचने के रास्तों को बेहतर बनाकर, यह पहल 2036 के लिए भारत के खेल संबंधी लक्ष्यों और विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण में योगदान देने का प्रयास करती है।

 

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Author: sajagkutch

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