यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से 168 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा

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नई दिल्ली। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से करीब 144 अरब यूरो यानी लगभग 168 अरब अमेरिकी डॉलर का कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदा है। एक यूरोपीय थिंक टैंक के अनुसार, इसी अवधि में रूस ने तेल और गैस की बिक्री से लगभग 1.16 लाख करोड़ डॉलर की कमाई की है। इस तरह भारत, चीन के बाद रूस से कच्चा तेल आयात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध के बाद चीन ने रूस से 245 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा है। इसके अलावा चीन ने 50 अरब डॉलर का कोयला और 47 अरब डॉलर की गैस भी रूस से आयात की है। इस तरह चीन की रूस से कुल ऊर्जा खरीद 342 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। वहीं यूरोपीय संघ ने भी रूस से कुल 254 अरब डॉलर का आयात किया है, जिसमें 123 अरब डॉलर का तेल, 126 अरब डॉलर की गैस और 5 अरब डॉलर का कोयला शामिल है। 1 जनवरी 2026 तक रूस ने पूरी दुनिया में तेल, गैस और कोयले की बिक्री से कुल 1.16 लाख करोड़ डॉलर कमा लिए थे, जिससे वह युद्ध जारी रखने में सक्षम रहा।

यूक्रेन पर रूस के हमले के जवाब में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जापान, इटली, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय संघ समेत कई देशों ने रूस पर निर्यात प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि इन प्रतिबंधों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी नहीं मिली। चीन, भारत, ईरान, यूएई, इजराइल और सऊदी अरब जैसे देशों ने इन एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया, जिसके कारण ये प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से लागू नहीं हो सके। फिलहाल रूस पर लगाए गए प्रतिबंध मुख्य रूप से जी-7 देशों तक ही सीमित हैं।

गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत पारंपरिक रूप से मध्य-पूर्वी देशों से कच्चा तेल आयात करता था और भारत की कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम, यानी लगभग 0.2 प्रतिशत थी। लेकिन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस ने भारत को भारी छूट पर कच्चा तेल देने की पेशकश की। वर्ष 2022 में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल थी, तब रूस ने भारत को 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास तेल उपलब्ध कराया। इस अवसर का लाभ उठाते हुए भारत ने बड़ी मात्रा में सस्ते दाम पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप भारत की कुल कच्चा तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत से भी अधिक हो गई।

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Author: sajagkutch

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