गुजरात वन विभाग का ऐतिहासिक फैसला, 427 वनरक्षकों को मिला वनपाल पद पर प्रमोशन

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गुजरात वन विभाग ने राज्य में वन एवं वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। विभाग ने एक ही आदेश के तहत 427 वनरक्षकों (बीट गार्ड) को वनपाल (फॉरेस्टर) पद पर पदोन्नत किया है। यह गुजरात वन विभाग के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक प्रमोशन आदेश माना जा रहा है, जिससे फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों में उत्साह और संतोष का माहौल देखने को मिला है।

लंबे समय से वन विभाग के कर्मचारियों में पदोन्नति और अन्य मांगों को लेकर असंतोष बना हुआ था। कुछ महीने पहले वनकर्मियों ने गांधीवादी तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन भी किया था। ऐसे में यह निर्णय विभागीय कार्यप्रणाली को मजबूती देने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढांचे को और प्रभावी बनाएगा।

यह पदोन्नति आदेश 8 जनवरी 2026 को वन एवं पर्यावरण विभाग के उप सचिव आसव गढ़वी द्वारा जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर अरण्य भवन द्वारा पदोन्नत कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

वनरक्षक, वर्ग-3 (वेतनमान 18,000 से 56,900 रुपये, पे मैट्रिक्स लेवल-1) से वनपाल, वर्ग-3 (वेतनमान 25,500 से 81,100 रुपये, पे मैट्रिक्स लेवल-4) के पद पर यह पदोन्नति दी गई है। इनमें से 425 कर्मचारियों को अस्थायी आधार पर, जबकि 2 कर्मचारियों को एडहॉक आधार पर पदोन्नति प्रदान की गई है।

पदोन्नति सूची में वडोदरा सर्कल, सूरत सर्कल, जूनागढ़ वाइल्डलाइफ सर्कल, वलसाड सर्कल सहित राज्य के विभिन्न सर्कलों और जिलों के कर्मचारी शामिल हैं। कुछ कर्मचारी केवड़िया जंगल सफारी और अन्य डेप्युटेशन पर भी कार्यरत हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह पदोन्नति वरिष्ठता, न्यायालयीन मामलों और विभागीय जांच के अधीन रहेगी। साथ ही, कुछ कर्मचारियों को हिंदी परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त के साथ पदोन्नति दी गई है।

इस बड़े फैसले का सकारात्मक असर पूरे वन विभाग में देखा जा रहा है और कर्मचारियों को उम्मीद है कि इससे वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा से जुड़े कार्यों में और अधिक मजबूती आएगी।

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Author: sajagkutch

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