उत्तरायण का पर्व अब कुछ ही घंटों में शुरू होने वाला है। ऐसे में पतंग प्रेमियों के लिए सुरक्षा नियमों की जानकारी बेहद जरूरी हो गई है। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (AMC) और गुजरात स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (GSDMA) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस वर्ष उत्तरायण के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि या दुर्घटना से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
शहरभर में करीब 10 हजार जागरूकता पोस्टर लगाकर नागरिकों को यह बताया जा रहा है कि पतंग उड़ाते समय क्या करें और क्या न करें।
- पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुबह 6 बजे से पहले और शाम 6 बजे के बाद पतंग न उड़ाने की अपील की गई है, क्योंकि इस समय पक्षियों की आवाजाही अधिक रहती है।
- खतरनाक चाइनीज डोर या कांच लगी सिंथेटिक मांझे का उपयोग न करें। यह न केवल पक्षियों के लिए, बल्कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।
- जर्जर इमारतों या बिना सुरक्षा दीवार (पैरापेट) वाली छतों पर पतंग न उड़ाएं। संभव हो तो खुले मैदानों का उपयोग करें।
- छत पर या पतंग उड़ाते समय बच्चों पर लगातार नजर रखें।
- सड़क पर दौड़कर या चलती गाड़ियों के बीच पतंग पकड़ने की कोशिश न करें, इससे गंभीर हादसे हो सकते हैं।
- दुपहिया वाहन चलाते समय गले में स्कार्फ बांधें या वाहन पर सेफ्टी गार्ड लगवाएं, ताकि डोर से गला कटने की आशंका न रहे।
- छत पर हमेशा एक प्राथमिक उपचार किट (फर्स्ट एड किट) अपने पास रखें।
उत्तरायण के दौरान यदि कोई दुर्घटना होती है या कोई पक्षी घायल मिलता है, तो तुरंत निम्न नंबरों पर संपर्क करें:
- आपातकालीन सेवाएं: 112 / 108
- घायल पक्षियों की मदद (करुणा अभियान): 1962
शहर के सभी फायर स्टेशन, सिविल डिफेंस कार्यालय, सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में सुरक्षा से जुड़े स्टिकर लगाए गए हैं। इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें भी अलर्ट मोड पर रखी गई हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि लोग उत्तरायण का त्योहार खुशी और उत्साह के साथ मनाएं, लेकिन किसी की जान खतरे में न पड़े।
