भारत में गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। क्विक कॉमर्स सेक्टर में प्रचलित ‘10 मिनट डिलीवरी’ मॉडल को लेकर सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए कंपनियों को डिलीवरी की तय समय सीमा हटाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि तेज डिलीवरी के दबाव में डिलीवरी पार्टनर्स की जान जोखिम में डाली जा रही थी।
बीते एक महीने से गिग वर्कर्स की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही थी। 25 दिसंबर को बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स ने हड़ताल भी की थी, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार से इस मुद्दे पर नियम बनाने की मांग की थी। अब केंद्र सरकार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है।
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने क्विक कॉमर्स सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के साथ बैठक कर डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा पर चर्चा की। इसके बाद ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, स्विगी सहित कई कंपनियों ने सरकार को आश्वासन दिया है कि वे अपनी विज्ञापन सामग्री और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ‘10 मिनट डिलीवरी’ का दावा हटा देंगी। साथ ही डिलीवरी पार्टनर्स पर किसी भी तरह की समय सीमा का दबाव नहीं डाला जाएगा।
सरकार ने साफ किया है कि डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और समय से पहले डिलीवरी के नाम पर किसी की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि तेज डिलीवरी की प्रतिस्पर्धा ने डिलीवरी कर्मचारियों को जोखिम भरे हालात में काम करने के लिए मजबूर कर दिया था।
गौरतलब है कि 10 मिनट में डिलीवरी के दबाव के चलते कई डिलीवरी पार्टनर्स ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते नजर आते थे। समय पर ऑर्डर न पहुंचने की स्थिति में उन्हें खराब रेटिंग और नुकसान का सामना करना पड़ता था। इसी प्रतिस्पर्धा के कारण सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया था।
सरकार के इस फैसले को गिग वर्कर्स की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि क्विक कॉमर्स कंपनियां जिम्मेदारी के साथ डिलीवरी मॉडल को अपनाएंगी और डिलीवरी पार्टनर्स पर अनावश्यक दबाव नहीं डालेंगी।
