गुजरात में मकर संक्रांति यानी उत्तरायण का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया, लेकिन इसके साथ ही दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी भी देखने को मिली। राज्य की 108 इमरजेंसी सेवा द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 14 जनवरी को शाम 6 बजे तक पूरे गुजरात से कुल 3,810 इमरजेंसी कॉल दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक हैं।
यदि पिछले साल से तुलना की जाए तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। वर्ष 2025 में 14 जनवरी को शाम 6 बजे तक 3,318 इमरजेंसी कॉल आए थे, जबकि वर्ष 2026 में इसी समयावधि में 3,810 कॉल दर्ज हुए। यानी इस साल उत्तरायण के दिन 491 अधिक इमरजेंसी मामलों ने 108 सेवा पर दबाव बढ़ा दिया।
त्योहार के दौरान दर्ज किए गए मामलों में सबसे अधिक घटनाएं कांच लगी पतंग की डोर से जुड़ी रहीं। कई वाहन चालकों और राहगीरों के गले या शरीर के अन्य हिस्सों के कटने की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा पतंग उड़ाते समय या पेंच लड़ाते हुए छत और अगासियों से संतुलन बिगड़ने पर नीचे गिरने के मामले भी दर्ज हुए। पतंग पकड़ने के लिए दौड़ते समय या वाहन चलाते वक्त अचानक सामने आई डोर के कारण हुए सड़क हादसे, आपसी मारपीट, जलने की घटनाएं और पतंग लूटते समय बिजली के करंट से जुड़ी दुर्घटनाएं भी इमरजेंसी कॉल का बड़ा कारण रहीं।
राज्य के प्रमुख शहरों में पतंगबाजी का उत्साह अधिक होने के कारण इमरजेंसी कॉल्स की संख्या भी वहीं सबसे ज्यादा रही। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे महानगरों में 108 की टीमें पूरे दिन लगातार अलर्ट मोड पर काम करती रहीं।
वासी उत्तरायण को देखते हुए प्रशासन और 108 इमरजेंसी सेवा की ओर से नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। लोगों से कहा गया है कि सड़क पर पतंग पकड़ने के लिए जान जोखिम में न डालें, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और गले की सुरक्षा के लिए स्कार्फ या कपड़ा बांधें। साथ ही, छोटे बच्चों को छत पर पतंग उड़ाते समय अकेला न छोड़ने की भी हिदायत दी गई है।
