भारत और ओमान के बीच हजारों वर्षों पुराने समुद्री और सांस्कृतिक संबंधों में एक नया ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। भारतीय नौसेना का पारंपरिक रूप से निर्मित जहाज INSV कौडिन्य अपनी पहली पोरबंदर–मस्कट समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच गया है। मस्कट के पोर्ट सुल्तान काबूस पर केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जहाज के क्रू सदस्यों का भव्य स्वागत किया।
INSV कौडिन्य का उद्देश्य भारत की प्राचीन जहाज निर्माण कला को विश्व पटल पर प्रस्तुत करना है। यह जहाज अजंता की गुफाओं की चित्रकलाओं से प्रेरित है और इसे आधुनिक कीलों या धातु के जोड़ के बिना, केवल रस्सियों से सिलकर तैयार किया गया है, जिसे ‘स्टिच्ड-प्लैंक तकनीक’ कहा जाता है। यह ऐतिहासिक यात्रा भारत और ओमान के बीच लगभग 5,000 वर्ष पुराने व्यापारिक और सभ्यतागत समुद्री संबंधों को पुनर्जीवित करने का प्रतीक मानी जा रही है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ओमान के परिवहन और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री इंजीनियर सईद बिन हमूद के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच ‘ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर’ स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। सोनोवाल ने ओमान की कंपनियों को भारत के बड़े समुद्री बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए आमंत्रित किया, जिनमें महाराष्ट्र का 9 अरब डॉलर का वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट और तमिलनाडु का तूतीकोरिन पोर्ट विकास शामिल है।
मस्कट में आयोजित स्वागत समारोह में ओमान के पर्यटन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय समुदाय के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भारत और ओमान की पारंपरिक संस्कृति को दर्शाते हुए लोक नृत्य और संगीत प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच समुद्री विरासत और संग्रहालयों से जुड़े समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिससे भविष्य में भारत–ओमान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और समुद्री संबंध और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
