संग्रहालयों और सांस्कृतिक संस्थानों का डिजिटल रूपांतरण

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संग्रहालय संग्रहों और अभिलेखीय संसाधनों के डिजिटलीकरण के लिए पुणे स्थित सी-डीएसी के विकसित जतन (जेएटीएएन) सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हुए, संस्कृति मंत्रालय डिजिटल अभिलेखन और संग्रह प्रबंधन के क्षेत्र में विभिन्न पहल कर रहा है ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहरों को डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा सके। भारत के संग्रहालय पोर्टल के माध्यम से एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार बनाया गया है, जहां राष्ट्रीय स्तर के आठ संग्रहालयों, दो एएसआई साइट संग्रहालयों और पुणे स्थित डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर संग्रहालय के डिजिटल संग्रह उपलब्ध हैं। अब तक के डिजिटल लेखों को देखने के लिए

संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत शुरू किए गए ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य देश की विशाल हस्तलिखित धरोहर की रक्षा करना और भावी पीढ़ियों के लिए इसकी सभ्यतागत ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करना है। अभी ‘ज्ञान भारतम’ पोर्टल पर आम लोगों के लिए डिजिटल रूप में 3.5 लाख से ज़्यादा पांडुलिपियां उपलब्ध हैं

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) अपने विभिन्न ज्ञान भंडारों और डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत के डिजिटल संरक्षण, प्रलेखन और प्रसार के लिए व्यापक पहल कर रहा है। आईजीएनसीए ने पांडुलिपियों, तस्वीरों, दुर्लभ पुस्तकों, ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग, सांस्कृतिक प्रलेखन, कला वस्तुओं और अभिलेखीय संग्रहों को शामिल करते हुए व्यापक डिजिटल अभिलेखागार तैयार किए हैं और उन्हें बनाए रखा है।

 

संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय स्तर के संग्रहालयों के डिजिटलीकृत आंकड़ों का विवरण अनुलग्नक – I में संलग्न है।

 

संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) संग्रहालय प्रदर्शन प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) में अग्रणी है और आगंतुकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए निरंतर नवाचार कर रही है। संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कंप्यूटर विज़न और सेंसर-आधारित अंतःक्रिया जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को एकीकृत करके एनसीएसएम के अनुसंधान एवं विकास प्रयास सहज और आकर्षक प्रदर्शनियों को विकसित करने पर केंद्रित हैं जो आगंतुकों के अनुभव में सहजता से घुलमिल जाती हैं। इनमें गति ट्रैकिंग, नेत्र ट्रैकिंग, स्मार्ट सामग्री अनुकूलन और स्पर्श रहित अंतःक्रिया में प्रगति शामिल है। इसका लक्ष्य सीखने को अधिक गतिशील, व्यक्तिगत और सभी दर्शकों के लिए सुलभ बनाना है।

 

कोलकाता स्थित भारतीय संग्रहालय, विकास भी, विरासत भी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने एवं संरक्षित करने के अपने दायित्व के अनुरूप, विरासत संरक्षण और डिजिटल नवाचार को मजबूत करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोगात्मक पहल कर रहा है। भारतीय संग्रहालय ने अपने संग्रहों के डिजिटल संरक्षण के लिए पुरातात्विक कलाकृतियों के एआई आधारित जीर्णोद्धार के उपयोग हेतु आईआईटी खड़गपुर के साथ साझेदारी की है।

 

संस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संगठन, सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र ( सीसीआरटी), भारतीय संस्कृति को शिक्षा के माध्यम से संरक्षित और बढ़ावा देने के उद्देश्य से शिक्षकों, शिक्षक प्रशिक्षकों और छात्रों के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत, अनुभवात्मक शिक्षा और विरासत जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए संग्रहालयों और अन्य सांस्कृतिक संस्थानों के सहयोग से संग्रहालयों, विरासत स्मारकों और प्रकृति उद्यानों की शैक्षिक यात्राएं आयोजित की जाती हैं। इनमें दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय आधुनिक कला गैलरी, राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी, राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, स्वच्छता केंद्र, कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा और लाल किला शामिल हैं। इसी प्रकार के सहयोग सीसीआरटी के क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से सालारजंग संग्रहालय (हैदराबाद), भारतीय लोक कला मंडल (उदयपुर), असम राज्य संग्रहालय (गुवाहाटी) और रानी दमयंती पुरातत्व संग्रहालय (दमोह) की यात्राओं के लिए भी किए जाते हैं।

 

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पुरातन और निर्मित धरोहर स्थलों का डिजिटल प्रलेखन राष्ट्रीय स्मारक पुरातन मिशन (एनएमएमए) के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, गोवा स्थित एएसआई संग्रहालय की 723 पुरातन वस्तुओं और नागार्जुनकोंडा स्थित एएसआई संग्रहालय की 8,450 पुरातन वस्तुओं का डिजिटल प्रलेखन किया गया है और संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से पुणे स्थित सी-डीएसी के विकसित जतन (जेएटीएएन) सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया गया है।

 

संस्कृति मंत्रालय ने प्रौद्योगिकी-आधारित आगंतुक अनुभव और डिजिटल पहुंच को बेहतर बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

 

पांडुलिपियों, तस्वीरों और अभिलेखीय संग्रहों का डिजिटलीकरण।

चुनिंदा प्रकाशनों और अभिलेखीय संसाधनों तक ऑनलाइन पहुंच।

मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का डिजिटल दस्तावेजीकरण।

प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के दौरान मल्टीमीडिया और इंटरैक्टिव प्रौद्योगिकियों का उपयोग।

इन पहलों से शोधकर्ताओं, छात्रों और आम जनता के लिए सांस्कृतिक संसाधनों तक पहुंच में काफी सुधार हुआ है।

संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) देश के विभिन्न भागों में स्थित 26 इकाइयों (परिशिष्ट-II में सूचीबद्ध) के साथ विज्ञान संग्रहालयों/केंद्रों की सर्वोच्च संस्था है। एनसीएसएम में ऐसे प्रदर्शन हैं जो मुख्य रूप से प्रत्यक्ष अनुभव और सहभागिता पर आधारित हैं और जिनका विकास संस्था के भीतर ही किया गया है। एनसीएसएम अपने नियंत्रण में आने वाले संग्रहालयों और केंद्रों के उन्नयन, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए आवधिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रत्येक वर्ष एक सुविचारित वार्षिक कार्य योजना तैयार करता है, ताकि आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाया जा सके, जिसमें हिमाचल प्रदेश राज्य के पालमपुर में स्थित पालमपुर विज्ञान केंद्र भी शामिल है।

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Author: sajagkutch

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