प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं के प्रयास और समर्पण की सराहना करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के युवाओं के प्रयासों और समर्पण की सराहना करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है:

 

“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।

तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ॥”

 

श्री मोदी ने कहा है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से हमारी प्रतिभा निखरती है और उसमें सुधार होता है, और हमारे युवा इन्हीं गुणों को अपनाकर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।

 

प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा है:

निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है। आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।

तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ॥

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Author: sajagkutch

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