राज्यसभा के सभापति द्वारा ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर दिए गए भाषण का मूल पाठ

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सभापति: माननीय सदस्यगण, 9 अगस्त , 2026 को ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन की 84 वीं वर्षगांठ है, जो हमारे राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक है। महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में 9 अगस्त, 1942 को शुरू हुए इस आंदोलन ने भारत की स्वतंत्रता की निरंतर मांग को निर्णायक गति प्रदान की। “करो या मरो” के आह्वान ने देश भर के लाखों भारतीयों को सभी बाधाओं को पार करते हुए राष्ट्र की स्वतंत्रता के साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होने के लिए प्रेरित किया।

अत्यधिक दमन, कारावास और अत्यंत कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए असाधारण साहस, दृढ़ संकल्प और अटूट प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। उनके निस्वार्थ बलिदान और अडिग संकल्प ने राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत किया और वर्ष 1947 में देश को स्वतंत्रता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।

आइए, इस ऐतिहासिक अवसर पर हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करें जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और हमारी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अदम्य बलिदान दिए। देशभक्ति, एकता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण के उनके आदर्श हमें एक मजबूत, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक प्रयास में निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

मुझे पूरा विश्वास है कि सदन के सभी सदस्यगण स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने में मेरा साथ देंगे।

माननीय सदस्यगण, आपसे निवेदन है कि आप अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर मौन धारण करें, जो इन वीर आत्माओं की स्मृति में सम्मान का प्रतीक होगा।

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Author: sajagkutch

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