प्रधानमंत्री ने नि:स्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नदियों का अविरल प्रवाह हमें सिखाता है कि हम किस प्रकार अपनी क्षमताओं का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।

इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”

इस सुभाषितम् का संदेश है कि हमें अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियां निरंतर और निस्वार्थ भाव से बहती हुई अपने जल मार्ग में आने वाले असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंतत: समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना समय, क्षमता और संसाधन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता नि:स्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण में ही निहित है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:

“नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।

जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।

इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”

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Author: sajagkutch

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