हाल के व्यापार समझौतों में भारत‑अमेरिका और भारत‑यूरोपीय संघ के बीच बड़े समझौते ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र में निर्यात प्रतिस्पर्धा के समीकरण को बदल दिया है। विशेष रूप से भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते के बाद अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को कम कर दिया है जिससे भारत को निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ी है। वहीं पाकिस्तान जैसे देशों के निर्यातकों को चिंता का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि भारत को नई व्यापार सुविधाएँ मिल रही हैं जो पुराने निर्यातक देशों की बाजार हिस्सेदारी को कम कर सकती हैं। इसी तरह भारत‑EU मुक्त व्यापार समझौते के प्रभाव से भी पाकिस्तान के लिए यूरोपीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को बनाए रखना मुश्किल होता दिख रहा है, विशेषकर वस्त्र और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में जहां भारतीय सामान को अधिक सुविधाएँ मिल रही हैं। पाकिस्तान के निर्यात क्षेत्र, विशेषकर टेक्सटाइल और परिधान उद्योग, को अब अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा और संभावित बाजार हिस्सेदारी के नुकसान जैसे गंभीर आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे व्यापारिक संकट और रोजगार पर असर होने के जोखिम बढ़ गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि क्षेत्रीय व्यापार संरचना में आए इन बदलावों से पाकिस्तान की निर्यात क्षमता और दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते से पाकिस्तान के निर्यात क्षेत्र पर संकट: बाजार हिस्सेदारी और प्रतिस्पर्धा में गिरावट की आशंका
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