कोस्टा रिका के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र डिक्वीस डेल्टा में पाए गए सैकड़ों साल पुराने पूरी तरह गोल पत्थर आज भी दुनिया के लिए एक गहरी पहेली बने हुए हैं। इन रहस्यमय पत्थरों की खोज पहली बार 1930 के दशक में तब हुई थी, जब केले के बागानों के लिए सड़क निर्माण के दौरान खुदाई की जा रही थी। ये पत्थर बेहद कठोर ज्वालामुखीय चट्टानों से बने हुए हैं। सबसे बड़े पत्थर का व्यास करीब 9 फीट और वजन लगभग 26 टन तक बताया जाता है।
शोध से यह सामने आया कि इन गोल पत्थरों का निर्माण स्पेनिश उपनिवेश से पहले यहां रहने वाले मूल निवासियों ने किया था, जो 16वीं सदी से पहले इस क्षेत्र को छोड़ चुके थे। हैरानी की बात यह है कि इतनी प्राचीन तकनीक से बनाए गए ये पत्थर आज भी लगभग परफेक्ट गोल आकार में मौजूद हैं, जिसे आधुनिक तकनीक से भी बनाना बेहद कठिन माना जाता है।
कुछ पुरातत्वविदों का मानना है कि ये पत्थर स्टेटस सिंबल के रूप में इस्तेमाल किए जाते थे और इन्हें खास लोगों के घरों के प्रवेश द्वार पर रखा जाता था। वहीं, कुछ विशेषज्ञ इन्हें ज्योतिषीय, धार्मिक या आध्यात्मिक महत्व से जोड़कर देखते हैं। रहस्य को और गहरा करने वाली कई अटकलें भी सामने आई हैं—कुछ लोग इन्हें खोए हुए एटलांटिस सभ्यता के नेविगेशन संकेत मानते हैं, तो कुछ का दावा है कि ये एलियन यानों से गिराए गए प्रोजेक्टाइल हो सकते हैं।
खोज के बाद इनमें से कई गोल पत्थरों को सजावट के लिए सरकारी इमारतों, बैंकों और कार्यालयों के बाहर रखा गया। कुछ पत्थर न्यूयॉर्क और डेनवर के म्यूज़ियम तक पहुंच गए, जबकि एक पत्थर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कैंपस में भी मौजूद है। हालांकि, असली स्थान से हटाए जाने के कारण इनके वैज्ञानिक अध्ययन में काफी मुश्किलें आईं।
डिक्वीस डेल्टा और कोस्टा रिका के प्रशांत तट के पास आज भी कई पत्थर अपने मूल स्थान पर मौजूद हैं। चोरी से बचाने के लिए इन्हें 1980 के दशक में राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया और इनके निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। अंततः 2014 में यूनेस्को ने इस क्षेत्र को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया।
इतिहासकारों का मानना है कि ये पत्थर मुख्य रूप से चिरिकी संस्कृति (ईसा पूर्व 800 से 1500) के समय बनाए गए थे, जब इस क्षेत्र में सरदारों का शासन था। संभव है कि किसी खास उद्देश्य या शक्ति के प्रतीक के रूप में इनका निर्माण किया गया हो। आखिरकार, इतनी सटीक गोलाई और पॉलिश कैसे हासिल की गई—यह रहस्य आज भी विज्ञान और इतिहास दोनों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है।
