वाघोडिया तहसील में देव नदी के किनारे बसे गांवों में तेंदुए की लगातार गतिविधियों से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। बार-बार हो रहे हमलों के चलते लोग सहमे हुए हैं। वन विभाग द्वारा तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है, लेकिन अब तक तेंदुआ उसमें कैद नहीं हो सका है।
वाघोडिया तालुका के अंतिम छोर पर स्थित देव नदी के किनारे बसे गांवों में आए दिन तेंदुए की चहल-कदमी देखी जा रही है। मौका मिलते ही तेंदुआ मवेशियों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना रहा है, जिससे पशुपालकों और किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। नदी किनारे घने झाड़ियों और प्राकृतिक आवास के कारण तेंदुए की आवाजाही यहां लगातार बनी रहती है और कई बार वह मानव बस्तियों के पास भी पहुंच जाता है।
बीती रात डंखेला गांव में तेंदुए के एक और हमले की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों में दहशत और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में केवल एक नहीं, बल्कि एक से अधिक तेंदुए सक्रिय हो सकते हैं। खेतों और गांव के आसपास मिले पंजों के निशानों से कई तेंदुओं की मौजूदगी का अनुमान लगाया जा रहा है। लगातार हो रहे हमलों की सूचना वन विभाग को दी गई थी, जिसके बाद विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया। हालांकि, अब तक तेंदुआ पिंजरे में फंसा नहीं है।
ग्रामीणों का मानना है कि तेंदुए अब और अधिक सतर्क हो गए हैं, जिसके कारण उन्हें पकड़ना मुश्किल होता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, फसलों की सुरक्षा के लिए रात के समय खेतों में जाना अब जोखिम भरा हो गया है। अब तक तेंदुआ मुख्य रूप से मवेशियों पर हमला करता रहा है, लेकिन लोगों को आशंका है कि वह कभी भी इंसानों पर हमला कर सकता है। इसी डर के चलते गांवों में रात के समय सन्नाटा पसरा रहता है।
वन विभाग की ओर से प्रयास जारी हैं, लेकिन तेंदुए को पकड़ने में अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। इससे ग्रामीणों की चिंता और भय लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग मांग कर रहे हैं कि वन विभाग जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए ताकि गांवों में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
