भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान और चीन सहित देश की आंतरिक व बाहरी सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। 15 जनवरी को मनाए जाने वाले ‘आर्मी डे’ से पहले 13 जनवरी को दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पार इस समय करीब 8 आतंकी कैंप सक्रिय हैं। भारतीय सेना इन सभी कैंपों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाकिस्तान की किसी भी गलती का जवाब तुरंत और सख्ती से दिया जाएगा।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद महज 22 मिनट के भीतर ‘ऑपरेशन रीसेट’ रणनीति के तहत जवाबी कार्रवाई की गई थी और फिलहाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है। उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान की परमाणु धमकियों का भारत पर कोई असर नहीं है और अब ये रणनीति भारत-चीन सीमा पर भी अप्रभावी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति संवेदनशील जरूर है, लेकिन पूरी तरह भारतीय सेना के नियंत्रण में है।
उत्तरी सीमा पर चीन के साथ हालात को लेकर आर्मी चीफ ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय वार्ताओं के चलते सीमा पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और फिलहाल हालात स्थिर हैं, हालांकि सेना पूरी तरह सतर्क बनी हुई है। इसके अलावा मणिपुर में सुरक्षा बलों और सरकार के समन्वित प्रयासों से शांति बहाली की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि म्यांमार में चुनाव के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग और मजबूत होगा।
सेना के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना तेजी से अत्याधुनिक तकनीक को अपना रही है। आने वाले समय में सेना ब्रह्मोस मिसाइल, हाई-टेक ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसी आधुनिक क्षमताओं को और मजबूत करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि सेना का 90 प्रतिशत से अधिक गोला-बारूद अब स्वदेशी है। साथ ही वर्ष 2026 को ‘नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष’ घोषित किया गया है, जिससे युद्ध के मैदान में रियल-टाइम निर्णय लेने की क्षमता और अधिक प्रभावी
