उत्तरायण 2026 के अवसर पर अहमदाबाद में सुबह से ही उत्सव का माहौल देखने को मिला। हालांकि दिन की शुरुआत में हवा की रफ्तार कम रहने के कारण पतंग प्रेमियों को थोड़ी निराशा हाथ लगी, फिर भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। सुबह से ही शहरवासी छतों पर चढ़कर खाने-पीने और साथ में समय बिताने का आनंद लेते नजर आए। दोपहर बाद हवा की गति में हल्की बढ़ोतरी हुई, जिससे उत्तरायण का रंग कुछ हद तक जम सका।
जैसे ही शाम ढली, अहमदाबाद के अधिकांश इलाकों में आतिशबाज़ी का दौर शुरू हो गया। लोगों ने स्काई शॉट समेत तरह-तरह के पटाखे फोड़े, जिससे शहर का आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। चारों ओर धमाकों की गूंज और रोशनी की छटा ने उत्तरायण की शाम को दीपावली जैसा रूप दे दिया।
कई इलाकों में लोगों ने सिर्फ आतिशबाज़ी ही नहीं, बल्कि गरबा और डांस के जरिए भी उत्सव को खास बनाया। कुछ जगहों पर लोगों ने कोठियां जलाकर और संगीत के साथ नाच-गाकर उत्तरायण को उत्साहपूर्वक विदाई दी। हालांकि परंपरा के अनुसार अगले दिन वासी उत्तरायण भी मनाई जाती है, इसलिए पतंग प्रेमी बेहतर हवा की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
दिनभर हवा कम रहने के कारण आसमान में पतंगों की संख्या अपेक्षाकृत कम नजर आई। इसके बावजूद लोगों ने पतंग की जगह स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाया। कई परिवार और दोस्तों के समूह ने छतों पर मसालेदार उंधियू, जलेबी, फ्रूट सलाद और अन्य पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया। लोगों का कहना था कि पतंग न उड़ पाने के बावजूद आपसी मेलजोल और खाने-पीने ने उत्सव को यादगार बना दिया।
शहरवासियों ने अहमदाबाद के उत्तरायण माहौल पर संतोष जताया। लोगों का कहना था कि भले ही इस साल हवा कम रही और पतंगें पिछले साल की तुलना में कम दिखीं, लेकिन उत्सव का जोश और सामूहिक आनंद हमेशा की तरह बना रहा। कई लोगों ने वासी उत्तरायण पर अच्छी हवा चलने की उम्मीद भी जताई, ताकि पतंगबाजी का असली मज़ा लिया जा सके।
