मकर संक्रांति पर पतंग-फिरकी के श्रृंगार से अलौकिक रूप में सजे कष्टभंजन देव

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मकर संक्रांति और धनुर्मास एकादशी के पावन अवसर पर प्रसिद्ध तीर्थधाम सालंगपुर में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। 14 जनवरी को श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी को उत्तरायण पर्व के अनुरूप विशेष पतंग और फिरकी की थीम पर दिव्य श्रृंगार अर्पित किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय और उत्सवमय वातावरण से सराबोर हो उठा।

मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में मंदिर के पुजारियों द्वारा हनुमानजी दादा को विशेष वाघा धारण कराए गए। दादा के सिंहासन सहित पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे गेंदे के फूलों, पतंगों और डोर की फिरकियों से आकर्षक रूप से सजाया गया था। तड़के सुबह 5:45 बजे भक्तिपूर्ण माहौल में मंगल आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

इस पावन अवसर पर दादा को शीतकालीन फसलों और उत्तरायण की पारंपरिक वस्तुओं का भोग अर्पित किया गया। ममरा, तिल के लड्डू, विभिन्न प्रकार की चिक्की, कचरीयू और ड्रायफ्रूट से भव्य अन्नकूट सजाया गया, जिसे देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए।

मंदिर की गौशाला में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह 6 बजे से 11 बजे तक शास्त्रोक्त विधि से 108 गायों की महापूजा संपन्न हुई। संतों और यजमानों द्वारा गौमाताओं को केसर युक्त जल से स्नान कराया गया, उन्हें रेशमी वस्त्र पहनाए गए और गुड़ व मिठाइयों का भोग धराया गया। इसके साथ ही गौपालकों का भी सम्मान किया गया।

धनुर्मास के दौरान चल रहे हनुमान चालीसा पाठ और “ॐ नमो हनुमते भयभंजनाय सुखम् कुरु फट् स्वाहा” मंत्र जाप यज्ञ की पूर्णाहुति दोपहर 11:30 बजे की गई। विश्व कल्याण और पारिवारिक शांति की कामना के साथ किए गए इस यज्ञ में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया।

मकर संक्रांति के इस विशेष आयोजन के चलते सालंगपुर धाम में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। वहीं, देश-विदेश में रहने वाले हजारों भक्तों ने सोशल मीडिया और यूट्यूब के माध्यम से ऑनलाइन दर्शन कर इस पावन पर्व का आध्यात्मिक लाभ लिया।

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Author: sajagkutch

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