बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े स्तर पर दल-बदल के संकेत मिल रहे हैं, जिससे राज्य का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। चर्चाएं हैं कि कांग्रेस के सभी 6 विधायक जल्द ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में कांग्रेस का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस के ये विधायक पार्टी की कार्यशैली से नाराज़ बताए जा रहे हैं। हाल के दिनों में कांग्रेस द्वारा आयोजित अहम बैठकों और कार्यक्रमों से इन विधायकों की दूरी ने भी इस अटकल को और मजबूत कर दिया है। माना जा रहा है कि ये सभी विधायक लगातार नीतीश कुमार और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं।
यदि कांग्रेस के सभी 6 विधायक जेडीयू में शामिल होते हैं, तो नीतीश कुमार की पार्टी के पास विधानसभा में 91 विधायक हो जाएंगे और वह सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। फिलहाल भाजपा 89 विधायकों के साथ पहले स्थान पर है। ऐसे में जेडीयू के मजबूत होने से भाजपा को पीछे हटना पड़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर, भाजपा भी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए सक्रिय हो गई है। खबर है कि भाजपा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा’ (आरएलएम) के असंतुष्ट विधायकों पर नजर बनाए हुए है। बताया जा रहा है कि आरएलएम के चार में से तीन विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। ये विधायक उपेंद्र कुशवाहा द्वारा अपने बेटे को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं।
बिहार की राजनीति में एक और अहम हलचल ‘घर वापसी’ को लेकर भी देखी जा रही है। जेडीयू के पूर्व दिग्गज नेता आरसीपी सिंह, जो नीतीश कुमार से अलग होकर प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ में शामिल हो गए थे, उनके दोबारा जेडीयू में लौटने की अटकलें तेज हो गई हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की एक साथ मौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
इन सभी घटनाक्रमों के बीच साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार के सत्ताधारी गठबंधन में नंबर गेम और पदों को लेकर जबरदस्त राजनीतिक खींचतान देखने को मिल सकती है।
