अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव लगातार गहराता जा रहा है। वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी के अपहरण के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बार-बार ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात दोहराते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में अब डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड में अमेरिका के मुकाबले यूरोप के छह देशों ने अपनी सेनाएं तैनात करना शुरू कर दिया है।
डेनमार्क के साथ-साथ जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, नॉर्वे और अन्य यूरोपीय देशों की सैन्य टुकड़ियां ग्रीनलैंड पहुंचने लगी हैं। गुरुवार को डेनमार्क और फ्रांस की सेनाओं की पहली टुकड़ी ग्रीनलैंड पहुंची, जबकि अन्य देशों से भी सैनिकों को रवाना किया गया है। राजधानी नूक स्थित सैन्य अड्डे पर सी-130 हरक्यूलिस सैन्य विमान के उतरने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खनिज संसाधनों से समृद्ध ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की मंशा जाहिर करते रहे हैं। इस दिशा में अमेरिकी संसद में एक विधेयक भी पेश किया गया है। इसी कारण ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव तेज हो गया है। यूरोपीय देशों की सेनाएं सी-130 हरक्यूलिस जैसे सैन्य विमानों के जरिए नूक के सैन्य अड्डे पर पहुंच रही हैं और डेनमार्क समेत कई देशों ने आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य अभ्यास और तैनाती बढ़ा दी है।
डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रोल्स लुंड पोल्सन ने कहा है कि ग्रीनलैंड और उसके आसपास सैन्य गतिविधियों को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने के लिए जहाज, ड्रोन और फाइटर विमानों की तैनाती की तैयारी चल रही है। डेनमार्क के अलावा फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे और स्वीडन ने भी अपनी सेनाएं ग्रीनलैंड भेजनी शुरू कर दी हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि फ्रांसीसी सेना की पहली टुकड़ी रवाना हो चुकी है और आने वाले दिनों में और सैनिक भी पहुंचेंगे। जर्मनी के रक्षा मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि जर्मन सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजा जा रहा है, जहां वे नाटो के अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर सैन्य क्षमताओं को मजबूत करेंगे। नाटो के एक अधिकारी के अनुसार, गठबंधन भी आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, जिससे दुनिया के सबसे बड़े सैन्य संगठन नाटो के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ट ने वॉशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। बातचीत के बाद डेनमार्क ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका और डेनमार्क के बीच मूलभूत मतभेद बने हुए हैं।
डेनमार्क ने यह भी याद दिलाया कि शीत युद्ध के दौरान 1951 में हुए समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाने रखने का अधिकार मिला था। वर्तमान में वहां अमेरिकी सैन्य अड्डे पर लगभग 200 सैनिक तैनात हैं, जहां से स्पेस सर्विलांस रडार और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगातार सक्रिय हैं। अमेरिका रूस और चीन की गतिविधियों को देखते हुए अपनी निगरानी बढ़ा सकता है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि उन्हें केवल अमेरिकी नियंत्रण ही स्वीकार्य है।
ट्रम्प के इस कड़े रुख के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप आमने-सामने आ गए हैं और यह टकराव आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है।
