डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के पार, ऐतिहासिक गिरावट—SBI की सलाह: RBI 700 अरब डॉलर के भंडार से संभाले स्थिति

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भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर गया है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। यह गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इससे आयात महंगे हो सकते हैं और महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 30 मार्च 2026 को रुपया इंटरबैंक बाजार में लगभग 95.21 प्रति डॉलर तक गिर गया, हालांकि बाद में थोड़ा संभलते हुए करीब 94.83 पर बंद हुआ। यह गिरावट लगातार तीसरे दिन देखने को मिली, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालना (capital outflow) भी रुपये को कमजोर कर रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को संभालने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जैसे बैंकों के विदेशी मुद्रा पोजीशन पर सीमा लगाना, लेकिन इन उपायों का असर सीमित ही रहा है और रुपये की गिरावट पूरी तरह नहीं रुक पाई है।

इसी बीच, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिसर्च रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि RBI को अपने करीब 700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास पर्याप्त भंडार है जो 10 महीने से अधिक के आयात को कवर कर सकता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल कर रुपये को स्थिर किया जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेल कंपनियों के लिए अलग विदेशी मुद्रा व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि बाजार पर अचानक दबाव कम हो और रुपये की स्थिति बेहतर हो सके।

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Author: sajagkutch

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