गुजरात हाईकोर्ट द्वारा जारी हालिया परिपत्र के विरोध में वडोदरा वकील मंडल ने कड़ा रुख अपनाया है। वडोदरा वकील मंडल के निर्वाचित कार्यकारिणी सदस्यों की एक अहम बैठक नए एडवोकेट हाउस, न्याय मंदिर कोर्ट परिसर में मंडल के अध्यक्ष हसमुख के. भट्ट की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर अदालत की कार्यवाही से दो दिनों तक अलग रहने का निर्णय लिया गया।
बैठक में गुजरात हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 22 दिसंबर 2025 को जारी परिपत्र संख्या C-2002/2025 पर विस्तार से चर्चा की गई। इस परिपत्र में हाईकोर्ट द्वारा केवल कुछ विशेष गुजराती फॉन्ट—लोहित गुजराती, नोटोसैरिफ गुजराती और नोटोसैंस गुजराती—को फॉन्ट साइज 12 में मान्यता दी गई है।
वकील मंडल का कहना है कि ये मान्य फॉन्ट स्थानीय बार में व्यावहारिक रूप से प्रचलन में नहीं हैं। वर्तमान में अधिकांश वकील सुलेख, श्रुति, गूगल इंडिक, गूगल फोनेटिक और सरल जैसे फॉन्ट का उपयोग कर हरे (लेजर) पेपर पर केस फाइल करते हैं। इसके बावजूद 1 जनवरी 2026 से जिला अदालतों में हाईकोर्ट के आदेश के तहत नए परिपत्र का सख्ती से पालन शुरू कर दिया गया है, जिसके चलते कई जगहों पर केस फाइलिंग बंद हो गई है।
वडोदरा वकील मंडल ने मांग की है कि जब तक स्थानीय बार में प्रचलित फॉन्ट को हाईकोर्ट द्वारा मान्यता नहीं दी जाती, तब तक पुराने फॉन्ट में दाखिल किए गए मामलों को अदालतों द्वारा स्वीकार किया जाए। वकीलों का कहना है कि परिपत्र को तत्काल लागू करना व्यवहारिक नहीं है।
इस मुद्दे को लेकर वकील मंडल ने 2 जनवरी 2026 से 3 जनवरी 2026 तक न्यायालय की कार्यवाही से अलग रहने का प्रस्ताव पारित किया है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि यदि नए फॉन्ट अनिवार्य रूप से लागू करने हैं, तो वकीलों को प्रशिक्षण देने और इसे लागू करने के लिए कम से कम तीन महीने का समय दिया जाए।
वकील मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया, तो अदालत की कार्यवाही से दूर रहने की अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल इस फैसले से जिला न्यायालयों में न्यायिक कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
