उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत कार्याधीन भारतीय मानक ब्यूरो ने मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी के आयुर्वेद विभाग, एकीकृत चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र के सहयोग से 9 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। टीएमए पाई सभागार में यह कार्यशाला विशेष रूप से आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्योग प्रतिनिधियों के लिए आयोजित की गई। इसमें देश भर से लगभग 180 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयुर्वेद गुणवत्ता, सुरक्षित औषधि और वैश्विक भरोसा बढ़ाने के सामूहिक प्रयास में यह आयोजन उल्लेखनीय रहा।
भारतीय मानक ब्यूरो के प्रेरक वाक्य “मानकः पथप्रदर्शकः” से प्रेरित कार्यशाला में शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक और नियामक ढांचे के साथ सामंजस्य स्थापित करने में मानक की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया गया।
भारतीय मानक ब्यूरो की आयुर्वेद अनुभागीय समिति के अध्यक्ष जयंत देवपुजारी ने अपने संबोधन में कहा कि कार्यशाला संरचित और सार्थक मानकीकरण द्वारा पारंपरिक ज्ञान को समकालीन आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के तौर पर स्थापित करने के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक दायित्व का उल्लेख किया।
उद्घाटन सत्र में मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी के स्वास्थ्य विज्ञान विभाग के सम-कुलपति डॉ. शरथ के राव ने आयुर्वेद जैसी पारंपरिक प्रणालियों में मानकीकरण की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सरकार की इस राष्ट्रीय पहल को आगे बढ़ाने में मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी और इसके विभिन्न विभागों के पूर्ण संस्थागत सहयोग के प्रति आश्वस्त कराया।
