राज्य के अन्य शहरों की तरह वडोदरा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव ने दर्शकों का खूब ध्यान खींचा, लेकिन हवा की कमी के कारण पतंगबाजों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। नवलक्खी मैदान में आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश से आए पतंगबाजों को अपनी कलात्मक और विशाल पतंगें उड़ाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, डेनमार्क, स्वीडन, रूस, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका और कोलंबिया समेत 18 देशों के पतंगबाजों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा भारत के राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार, सिक्किम और ओडिशा सहित सात राज्यों से करीब 160 पतंगबाज अपनी अनोखी डिज़ाइन की विशाल और आकर्षक पतंगों के साथ मैदान में उतरे।
हालांकि, महोत्सव के दौरान मौसम ने साथ नहीं दिया। हवा की रफ्तार बेहद कम होने के कारण खासकर विदेशी पतंगबाज अपनी भारी और बड़े आकार की पतंगें आसमान में नहीं उड़ा सके। निराशा उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। इसके साथ ही दोपहर की तेज गर्मी ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं।
पतंगबाजों का कहना था कि पतंग महोत्सव को सफल बनाने के लिए कम से कम 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार हवा चलना जरूरी होती है। बावजूद इसके, दर्शकों को निराश न करने के लिए उन्होंने थोड़े समय के लिए ही सही, पतंगें उड़ाने का प्रयास जरूर किया।
महोत्सव के दौरान पतंगबाजों को गुजरात की पारंपरिक गरबा की झलक भी दिखाई गई। साथ ही उत्तरायण के खास व्यंजन ऊंधियू, जलेबी और चिक्की का स्वाद भी चखाया गया, जिससे विदेशी मेहमानों ने गुजराती संस्कृति का आनंद लिया।
महोत्सव के दौरान एक और समस्या सामने आई। कुछ स्थानीय लोग कांच लगी डोर और बाजार में मिलने वाली छोटी पतंगें उड़ाकर मैदान के अंदर और बाहर से डिजाइनर पतंगों को काटने की कोशिश करने लगे। इससे दो पतंगबाजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। एक पतंगबाज ने तो ऐसी हरकत करने वाले व्यक्ति की पतंग ही काट दी।
इसके बाद मंच से स्थानीय लोगों से अपील की गई कि वे नन्ही पतंगें न उड़ाएं। साथ ही चेतावनी दी गई कि नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोजन स्थल पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को भी ऐसे लोगों को रोकने और बाहर निकालने के निर्देश दिए गए, ताकि महोत्सव सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
