अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की मौजूदा टर्म पूरी होने से पहले ही भाजपा के वर्तमान पदाधिकारी आपस में टकराते नजर आ रहे हैं। शहर के मेयर को कॉर्पोरेशन की ओर से आवंटित विशेष बजट और उस बजट से किए गए खर्च की गलत आंकड़ीय जानकारी दिए जाने के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है और शिकायत सीधे मेयर तक पहुंच गई है।
शुक्रवार को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के बाद मेयर की एंटी-चेंबर में एक गोपनीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कॉर्पोरेशन के दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। साथ ही इस प्रकरण में एक कनिष्ठ कर्मचारी को जिम्मेदार मानते हुए निलंबित किए जाने की जानकारी भी विश्वसनीय सूत्रों से सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद के प्रथम नागरिक यानी मेयर को हर वर्ष आवंटित नियमित बजट के अलावा अतिरिक्त विशेष बजट भी दिया जाता है। इस बजट में से कितनी राशि कहां खर्च की गई, इसकी जानकारी एक आवेदक ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। लेकिन आरटीआई के जवाब में दी गई जानकारी में कई आंकड़ीय विसंगतियां पाई गईं, जिसके चलते इस मामले की शिकायत मेयर तक पहुंचाई गई।
शुक्रवार को मेयर की एंटी-चेंबर में मेयर, डिप्टी मेयर, स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन, पक्ष नेता, म्युनिसिपल कमिश्नर और अकाउंट विभाग के अधिकारियों के बीच बंद दरवाजों के पीछे लंबी चर्चा हुई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा पदाधिकारियों की ओर से वर्तमान चीफ अकाउंटेंट और वित्त विभाग का प्रभार संभाल रहे डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर के विभाग बदलने का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा सामने आई है।
चुनाव से पहले भाजपा के पांच पदाधिकारियों के आमने-सामने आने से कॉर्पोरेशन में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। यह भी चर्चा है कि भाजपा के मौजूदा पदाधिकारी ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए आरटीआई का सहारा ले रहे हैं।
