भाजपा के 45 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा, दो दिग्गज नेताओं को लगा बड़ा झटका

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बनने जा रहा है। 45 वर्षीय नितिन नवीन का पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भाजपा के संस्थापक और वरिष्ठतम नेताओं में शामिल लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पार्टी के 45 साल के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।

दिसंबर 2025 से भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन अब पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। वे बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और पूर्व मंत्री भी हैं। नितिन नवीन भाजपा के दिग्गज नेता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले नितिन नवीन संगठनात्मक मामलों में गहरी पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पार्टी को चुनावी सफलता दिलाने में उनकी भूमिका को भी काफी अहम माना जाता है।

भाजपा की स्थापना वर्ष 1980 के बाद यह पहला अवसर है जब लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। इसके पीछे किसी भी प्रकार की राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि पूरी तरह तकनीकी कारण बताए जा रहे हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनावों का पूरा होना आवश्यक होता है।

वर्तमान में आडवाणी और जोशी दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य माने जाते हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में अब तक संगठनात्मक चुनाव पूरे नहीं हुए हैं। जब तक दिल्ली में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव संपन्न नहीं होते, तब तक राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों की अंतिम सूची तैयार नहीं की जा सकती। इसी कारण दोनों वरिष्ठ नेताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।

भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा कर दी है। नितिन नवीन 19 जनवरी को अपना नामांकन दाखिल करेंगे और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन प्रस्तावकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे शीर्ष नेता शामिल होंगे।

जेपी नड्डा की जगह लेने जा रहे नितिन नवीन के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां और चुनौतियां होंगी। उनका सबसे बड़ा लक्ष्य वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करना होगा। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर बनाना भी उनके लिए बड़ी चुनौती रहेगा। युवा नेतृत्व के जरिए भाजपा अब संगठन की अगली पीढ़ी को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है।

sajagkutch
Author: sajagkutch

Leave a Comment

और पढ़ें