गुजरात में स्थानीय स्वराज्य चुनाव से पहले आरक्षण का मुद्दा फिर गरमाया, सरकार की बढ़ी चिंता

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

गुजरात में आगामी महानगरपालिकाओं और पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है। पाटीदार, क्षत्रिय और ब्राह्मण समेत गैर-आरक्षित वर्गों ने स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों में 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। इससे चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है।

पाटीदार नेता वरुण पटेल और अन्य सामाजिक नेताओं ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि नगरपालिकाओं और पंचायत चुनावों में गैर-आरक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर और योग्य उम्मीदवारों को अवसर देने के लिए 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया जाए। दूसरी मांग ओबीसी आरक्षण को लेकर है। नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन इसका लाभ केवल उन्हीं क्षेत्रों में दिया जाए जहां ओबीसी आबादी पर्याप्त संख्या में मौजूद है। जहां ओबीसी जनसंख्या नगण्य है, वहां उन सीटों को अन्य वर्गों के लिए खुला रखा जाना चाहिए।

इन मांगों को मजबूती देने के लिए अगले सप्ताह गांधीनगर में पाटीदार, क्षत्रिय और ब्राह्मण समाज के नेताओं की एक अहम संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी और सरकार के समक्ष औपचारिक प्रस्तुति देने की योजना बनाई जाएगी। संभावना है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार को इस मुद्दे पर घेरा जा सकता है।

एक ओर जहां अभी अंतिम मतदाता सूची तैयार की जा रही है और चुनाव की तारीखों का इंतजार है, वहीं दूसरी ओर आरक्षण का यह मुद्दा भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है। वर्ष 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन ने जिस तरह राज्य सरकार को मुश्किल में डाला था, उसे देखते हुए सरकार इस बार समय रहते समाधान निकालने की कोशिश कर सकती है।

सामाजिक नेताओं का कहना है कि स्थानीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय संविधान प्रदत्त अधिकार हैं। यदि सरकार ने इस दिशा में उचित निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में गुजरात की सड़कों पर एक बार फिर बड़े आंदोलन देखने को मिल सकते हैं। खासतौर पर विधानसभा के बजट सत्र से पहले यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर और तेज होने के संकेत दे रहा है।

sajagkutch
Author: sajagkutch

Leave a Comment

और पढ़ें