मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में हाई-वोल्टेज ड्रामा, शंकराचार्य ने स्नान का किया बहिष्कार, बोले– “मेरे शिष्यों की पिटाई हुई”

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मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर जहां संगम नगरी प्रयागराज में करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा स्नान के बहिष्कार ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शंकराचार्य ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके शिष्यों के साथ मारपीट की गई और उन्हें पीटने के इशारे किए गए, इसी कारण उन्होंने संगम स्नान नहीं करने का निर्णय लिया।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने न केवल उनके शिष्यों को पीटा, बल्कि मारपीट के लिए इशारे भी किए। शंकराचार्य ने कहा कि ऐसी स्थिति में स्नान करना उनके लिए संभव नहीं है। उनके इस बयान से माघ मेले में मौजूद प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच हड़कंप मच गया।

इस विवाद के बावजूद मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। देर रात 12 बजे से ही श्रद्धालुओं का संगम की ओर पहुंचना शुरू हो गया था। प्रशासन के अनुमान के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर सकते हैं, जबकि अब तक करीब 50 लाख से ज्यादा लोग पवित्र डुबकी लगा चुके हैं।

भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। स्नान घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा पूरे माघ मेला क्षेत्र में पुलिस, पीएसी, आरएएफ, बीडीएस और यूपी एटीएस के जवानों के साथ खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों की मदद से पूरे मेला क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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Author: sajagkutch

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