Dakor Temple और Piplav Temple में गैस की भारी कमी के कारण प्रसाद बनाने की सेवा प्रभावित हो गई है। मंदिरों में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन रसोई में उपयोग होने वाली एलपीजी गैस की कमी के चलते प्रसाद वितरण अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, रसोई में लगातार गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे भोजन और प्रसाद तैयार करना मुश्किल हो गया है। खासकर बड़े पैमाने पर बनने वाले प्रसाद के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, जिसकी उपलब्धता फिलहाल बाधित है।
इस गैस संकट का मुख्य कारण मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव को माना जा रहा है। भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, और इन आपूर्तियों का अधिकांश भाग खाड़ी क्षेत्र से आता है। हालिया संघर्ष के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे गैस सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि देश के कई हिस्सों में गैस की कमी, लंबी कतारें और ब्लैक मार्केटिंग जैसी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। इसका असर केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, धार्मिक स्थल और छोटे व्यवसाय भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कही है, जिसके कारण कमर्शियल गैस की सप्लाई और अधिक प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि मंदिरों और बड़े रसोई संचालन वाले स्थानों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।
इस स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले घटनाक्रम का असर सीधे आम जीवन और धार्मिक व्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है। श्रद्धालुओं को फिलहाल प्रसाद सेवा में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, और स्थिति सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है।
