गैस संकट का असर: बिजनौर के बीआरसी केंद्र में लकड़ी के चूल्हों पर बन रहा शिक्षकों का भोजन

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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गैस सिलेंडर की कमी का सीधा असर सरकारी व्यवस्थाओं पर भी देखने को मिल रहा है। धामपुर स्थित बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) में चल रहे शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भोजन बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं हो पाई, जिसके चलते कर्मचारियों को मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों और तंदूर का सहारा लेना पड़ा।

दरअसल, यहां तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें शामिल शिक्षकों के लिए पहली बार भोजन की व्यवस्था की गई थी। लेकिन गैस की कमी के कारण निर्धारित व्यवस्था बाधित हो गई और खाना पारंपरिक तरीके से तैयार करना पड़ा।

भोजन बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाना काफी समय लेने वाला और मेहनत भरा काम है। गैस के मुकाबले इसमें अधिक दिक्कतें आती हैं और खर्च भी बढ़ जाता है, क्योंकि लकड़ी की कीमत भी अधिक हो गई है।

स्थिति को संभालने के लिए तंदूर लगाकर रोटियां बनाई जा रही हैं, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भोजन की व्यवस्था किसी तरह जारी रखी जा सके। हालांकि, यह अस्थायी समाधान है और गैस की नियमित आपूर्ति न होने पर ऐसी समस्याएं आगे भी बनी रह सकती हैं।

जिले में गैस की कमी का असर सिर्फ इस केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता और छोटे व्यवसायों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं और लोग वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने को मजबूर हैं।

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Author: sajagkutch

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