अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) यानी जेट ईंधन के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और वैश्विक कीमतों में उतार–चढ़ाव के प्रभाव को नियंत्रित करना है। वहीं, पेट्रोल के निर्यात शुल्क में राहत दी गई है।
नई अधिसूचना के अनुसार डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर और जेट ईंधन (ATF) पर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात शुल्क को घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू–राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे एक ओर घरेलू ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर निर्यात से होने वाले अतिरिक्त लाभ (विंडफॉल गेन) का संतुलन भी बनाया जा सकेगा।
सरकार समय–समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। माना जा रहा है कि यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी उतार–चढ़ाव जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में इस कर ढांचे में फिर बदलाव किया जा सकता है।
