थर्मल संयंत्रों के लिए कोयले की उपलब्धता

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देश में कोयले (लिग्नाइट सहित) पर आधारित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 230.8 गीगावाट है और अप्रैल से जून 2026 तक कुल आपूर्ति की गई बिजली में इसकी हिस्सेदारी 69.54 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्‍त गैर-सौर ऊर्जा की शीर्ष मांग के घंटों के दौरान ऐसे विद्युत संयंत्रों से प्राप्त अधिकतम उत्पादन लगभग 188.8 गीगावाट (कुल उत्पादन-251.4 गीगावाट का लगभग 75 प्रतिशत) है।

दिनांक 12 जुलाई 2026 तक, थर्मल ऊर्जा संयंत्रों में 42.8 मिलियन टन कोयले का भंडार उपलब्ध है, जो 85 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) पर 14 दिनों के लिए पर्याप्त है। साथ ही, वर्तमान में थर्मल ऊर्जा संयंत्रों को दैनिक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला प्राप्त हो रहा है।

थर्मल यूनिटों का निर्धारित रखरखाव विभिन्न महीनों की मांग को ध्यान में रखते हुए पहले से ही तय किया जाता है। शीर्ष महीनों के दौरान निर्धारित रखरखाव को कम से कम रखना एक मानक प्रक्रिया है। यदि मांग में वृद्धि आवश्यक हो तो सीईए संयंत्र के तकनीकी मापदंडों के आधार पर स्थिति के अनुसार रखरखाव को स्थगित करने की निगरानी करती है और अनुमति देती है।

विद्युत ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को एकीकृत करने के लिए, “केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (कोयला आधारित थर्मल विद्युत उत्पादन इकाइयों का लचीला संचालन) विनियमावली, 2023” को 30.01.2023 को अधिसूचित किया गया है। यह सभी कोयला आधारित थर्मल विद्युत उत्पादन इकाइयों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट चरणबद्ध योजना के अनुसार न्यूनतम 40 प्रतिशत तकनीकी स्तर प्राप्त करने को अनिवार्य बनाता है।

भारत सरकार ने मांग के शीर्ष समय के दौरान निर्बाध थर्मल विद्युत उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पहलें की हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:

  1. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 9,470 मेगावाट थर्मल ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है और चालू वित्त वर्ष में 2,260 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता चालू की गई है। विद्युत मंत्रालय, रेल मंत्रालय और कोयला मंत्रालय की एक संयुक्त समिति द्वारा थर्मल ऊर्जा संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति की दैनिक आधार पर निगरानी की जा रही है।
  2. कोयले की ढुलाई करने वाली गाड़ियों और बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति को भी प्राथमिकता दी गई है।
  3. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, कोयला मंत्रालय के सचिव और विद्युत मंत्रालय के सचिव सहित अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) की नियमित रूप से बैठक आयोजित की जा रही है ताकि थर्मल ऊर्जा संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति की बारीकी से समीक्षा की जा सके।
  4. अब तक लगभग 2,669 मेगावाट की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) और 7,426 मेगावाट की पंप भंडारण परियोजनाएं (पीएसपी) स्थापित की जा चुकी हैं, जिनका उद्देश्य सौर ऊर्जा के अभाव वाले समय में थर्मल संयंत्रों द्वारा बिजली उत्पादन को पूरक बनाना है। ये ऊर्जा भंडारण प्रणालियां (बीईएसएस/पीएसपी) सौर ऊर्जा के अभाव वाले समय में उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करती हैं और संग्रहित बिजली का उपयोग मुख्य रूप से सौर ऊर्जा के अभाव वाले समय में करती हैं।
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Author: sajagkutch

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