महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन कुएं एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी की खुदाई शुरू

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केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने आज महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन कुएं एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी की ड्रिलिंग शुरू होने की जानकारी दी। मंत्री जी ने इस अवसर को “ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत की यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत” बताते हुए कहा कि ड्रिलिंग की शुरुआत एक दशक के दूरदर्शी सुधारों का परिणाम है। इन सुधारों ने भारत के अन्वेषण और उत्पादन परिदृश्य को बदल दिया है।

 

महानदी अपतटीय बेसिन में आज से शुरू हो रहा एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी मूल्यांकन कुआँ भारत के सबसे संभावित अपतटीय बेसिनों में से एक का व्यवस्थित मूल्यांकन करने के लिए चार गहरे पानी के कुओं में से पहला है। इस ड्रिलिंग कार्यक्रम में विश्व स्तरीय गहरे पानी की ड्रिलिंग तकनीक का उपयोग करके नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पता लगाया जाएगा और भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत किया जाएगा।

 

मंत्री जी ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने ऐतिहासिक नीतिगत और नियामक सुधारों के माध्यम से अन्वेषण और उत्पादन तंत्र को बिल्कुल से बदल दिया है।

 

उन्होंने हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (एचईएलपी) की शुरुआत, नामांकन आधारित पद्धति के स्थान पर ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम (ओएएलपी) की स्थापना, पारदर्शी राजस्व बंटवारे ढांचे को अपनाने और पूर्व में प्रतिबंधित अपतटीय क्षेत्रों के लगभग 99% हिस्से को अन्वेषण के लिए खोलने के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि भारत के सक्रिय अन्वेषण क्षेत्रों में से लगभग 81% क्षेत्र 2014 के बाद आवंटित किए गए हैं जो इन सुधारों से निवेशकों और खोजकर्ताओं दोनों में पैदा हुए विश्वास को दर्शाता है।

 

मंत्री जी ने वैज्ञानिक अन्वेषण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सरकार ने मिशन अन्वेषण, राष्ट्रीय भूकंपीय कार्यक्रम, विस्तारित महाद्वीपीय शेल्फ सर्वेक्षण, राष्ट्रीय डेटा भंडार और हाइड्रोकार्बन संसाधन आकलन अध्ययन जैसी पहलों के माध्यम से भूवैज्ञानिक डेटा सृजन में निरंतर निवेश किया है जिससे भारत के सीमावर्ती बेसिनों को खोलने के लिए दुनिया के सबसे व्यापक भूवैज्ञानिक डेटाबेस में से एक का निर्माण हुआ है।

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Author: sajagkutch

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