पारेषण और वितरण अवसंरचना की पर्याप्तता पर आकलन

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नियमित रूप से साइट का दौरा किया जाता है।

 

(iii) तापीय विद्युत परियोजनाओं की निगरानी: विद्युत मंत्रालय निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा करता है। इसका उद्देश्‍य बाधाओं की पहचान करना और अंतर-मंत्रालयी तथा अन्य लंबित मुद्दों के समाधान में तेजी लाना है। 20.08.2024 को प्रारंभ किए गए तापीय परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी पोर्टल (प्रोम्‍प्ट पोर्टल) का उपयोग परियोजना की प्रगति की निगरानी के लिए किया जाता है। आवश्यकतानुसार, परियोजना सम्‍बंधी मुद्दों को सम्‍बंधित राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों के साथ भी उठाया जाता है और सक्रिय शासन तथा समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रगति पोर्टल पर इनकी समीक्षा की जाती है।

 

(ई) उत्पादन क्षमता उपयोग, पारेषण और वितरण दक्षता और ग्रिड लचीलापन बढ़ाने की दिशा में पहले से किए गए प्रयासों से बिजली की उपलब्धता, शुल्क, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास पर उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं:

 

केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के औसत घंटे वित्त वर्ष 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 22.6 घंटे हो गए हैं और शहरी क्षेत्रों में भी यह वित्त वर्ष 2014 में 22.1 घंटे से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 23.4 घंटे हो गए हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर वितरण कंपनियों का कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) घाटा वित्त वर्ष 2014 में 22.62 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 15.04 प्रतिशत हो गया है।

आपूर्ति की औसत लागत (एसीएस ) और प्राप्त औसत राजस्व (एआरआर) के बीच का अंतर एक प्रमुख संकेतक है। इससे पता चलता है कि क्या बिजली कंपनियां अपनी लागत वसूल कर रही हैं, वित्त वर्ष 2014 में 0.78 रुपये प्रति यूनिट से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 0.06 रुपये प्रति यूनिट हो गया।

29 जुलाई 2025 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई, जब देश ने बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की अब तक की सबसे अधिक हिस्सेदारी दर्ज की। उस दिन, नवीकरणीय स्रोतों ने देश की कुल 203 गीगावॉट बिजली मांग का 51.5 प्रतिशत पूरा किया।

2025-26 के दौरान 64,695 मेगावाट की रिकॉर्ड उत्पादन क्षमता वृद्धि हासिल की गई। इसमें से 50,905 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (बड़े जलविद्युत संयंत्रों को छोड़कर) से प्राप्त हुई, जो एक वर्ष में अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि है, और वित्त वर्ष 2024-25 में हासिल किए गए 34,054 मेगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गई है।

ऊर्जा की कमी वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 0.0 प्रतिशत हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में यह 4.2 प्रतिशत थी, जो आपूर्ति की पर्याप्तता में महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाती है।

भारत ने कॉप-26 में की गई अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करते हुए 2025 तक परंपरागत स्रोतों से अपनी स्थापित विद्युत शक्ति क्षमता का 50 प्रतिशत प्राप्त करने का एनडीसी लक्ष्य 2030 की निर्धारित समयसीमा से पांच साल पहले हासिल कर लिया ह

विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

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Author: sajagkutch

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