उज़्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य के दौरे से पहले प्रधानमंत्री के प्रस्थान वक्तव्य का पाठ

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राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव के निमंत्रण पर मैं 29-30 अगस्त को राजकीय दौरे पर ताशकंद जाऊँगा। हाल के वर्षों में भारत-उज़्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मैं राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा, ऊर्जा तथा विकसित भारत और यंगी उज़्बेकिस्तान के हमारे साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूँ। मैं ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करूँगा, जो हमारे दोनों देशों को जोड़ने वाले घनिष्ठ सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंधों को एक श्रद्धांजलि है।

ताशकंद से मैं किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाऊँगा, जहाँ मैं महत्वपूर्ण संगठन, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लूँगा। भारत 2017 से एससीओ का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। मैं सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर आधारित क्षेत्र के लिए भारत के विज़न को आगे बढ़ाने तथा क्षेत्र को आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के संकट से मुक्त बनाने के लिए अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए उत्सुक हूँ, जो हमारे पड़ोस और उससे परे भी शांति एवं स्थिरता के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।

मैं राष्ट्रपति जापारोव और एससीओ के अन्य नेताओं से मिलने तथा छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए भी उत्सुक हूँ। यह समारोह मध्य एशिया की समृद्ध जीवंत विरासत का उत्सव है, जिसका भारत गहरा सम्मान करता है।

मुझे विश्वास है कि यह दौरा मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को सुदृढ़ करेगा, इस क्षेत्र के साथ हमारे सभ्यतागत जुड़ाव को और गहरा करेगा तथा शांति, स्थिरता और समृद्धि की हमारी साझा आकांक्षा को आगे बढ़ाएगा। यही मूल्य विश्व के साथ भारत के जुड़ाव के मूल में भी हैं।

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Author: sajagkutch

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