नगर निगम आयुक्त के साथ हर महीने होने वाली समन्वय समिति की बैठक में इस बार माहौल काफी गर्म रहा। बैठक के दौरान भाजपा और कांग्रेस के विधायकों ने एक-दूसरे पर अवैध निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। एलिसब्रिज विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने जामलपुर इलाके में स्थित एक हेरिटेज बावड़ी की जमीन पर मकान बनाए जाने का मुद्दा उठाया, जिससे बैठक का स्तर गिरने के आरोप भी सामने आए।
एलिसब्रिज विधायक ने बताया कि जामलपुर क्षेत्र में मौजूद ऐतिहासिक बावड़ी की जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कर दिया गया है। इस पर नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह जांच की जाए कि उक्त निर्माण वर्ष 1985 से पहले का है या उसके बाद का। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि जामलपुर में ही नगर निगम स्कूल बोर्ड की जमीन पर दोबारा एक शेड खड़ा कर दिया गया है और उस जमीन का किराया भी अब तक वसूल नहीं किया गया है।
वहीं, दाणीलीमडा विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने निगम प्रशासन पर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीते तीन वर्षों से अवैध निर्माण को लेकर बिल्डरों को बार-बार नोटिस दिए जा रहे हैं, इसके बावजूद निगम द्वारा ऐसे निर्माण तोड़े नहीं जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिल्डर नगर निगम के अधिकारियों को हफ्ता देते हैं, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो रही। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने निगम अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत का खुला आरोप लगाया।
इस दौरान जामलपुर-खाडिया के विधायक ने भी बयान देकर विवाद को और हवा दे दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एलिसब्रिज विधायक को केवल जामलपुर क्षेत्र के ही अवैध निर्माण दिखाई देते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों की अनदेखी की जा रही है।
कुल मिलाकर, नगर आयुक्त के साथ हुई समन्वय समिति की बैठक अवैध निर्माण जैसे गंभीर मुद्दे पर ठोस समाधान निकालने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच बनती नजर आई, जिससे नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
