मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच लाल सागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को चेतावनी दिए जाने के बाद भारत और चीन की ओर कच्चा तेल लेकर जा रहे कई तेल टैंकरों ने अपना तय मार्ग बदल दिया। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण इन जहाजों ने लाल सागर के संवेदनशील क्षेत्र से आगे बढ़ने के बजाय वैकल्पिक मार्ग अपनाने का फैसला किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ता रहा, तो वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। जहाजों को लंबा समुद्री मार्ग अपनाने से परिवहन लागत, बीमा प्रीमियम और डिलीवरी समय बढ़ने की आशंका है। इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
भारत और चीन दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों में शामिल हैं। ऐसे में इस तरह की समुद्री बाधाएं दोनों देशों की ऊर्जा आपूर्ति और आयात लागत को प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल शिपिंग कंपनियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अपने मार्गों तथा परिचालन रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं। वैश्विक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता और गहरा सकती है।
